वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुरोहित धैर्य नारायण मिश्र ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के मुकुट सहित रामचरितमानस का पूजन किया। इसके बाद पात्रों को तिलक लगाकर मंचन की शुरुआत कराई गई। यह रामलीला वाराणसी की प्रसिद्ध रामनगर रामलीला की तर्ज पर आयोजित होती है, लेकिन इसकी विशेषता यह है कि अलग-अलग स्थलों पर मधुर संगीत और स्वर लहरियों के साथ मंचन होता है।

176 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही इस रामलीला में हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और लीला प्रेमी जुटते हैं। कार्यक्रम में प्राचीन रामलीला समिति के संरक्षक राधेश्याम चतुर्वेदी, अध्यक्ष मुकेश पांडेय सौरभ, प्रबंधक अभय शंकर चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष धर्मेंद्र पाठक, योगेश्वर त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष उमेश पांडेय, मंत्री गुड्डू पांडेय समेत समिति के अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।

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