एन.ए.ए.सी. से ए++ ग्रेड और एन.आई.आर.एफ. में 43वाँ स्थान प्राप्त श्याम लाल कॉलेज ने प्राचार्य प्रो. रबी नारायण कर के कुशल नेतृत्व में शैक्षणिक गुणवत्ता, नवाचार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना को आत्मसात करते हुए, कॉलेज समग्र, बहुविषयक तथा कौशल-आधारित शिक्षा को मूर्त रूप देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

“एस.आर.आई.एन.ई.पी. 2025” श्याम लाल कॉलेज की एक अनूठी पहल है, जो देशभर के नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों को एक मंच पर लाकर छात्र-नेतृत्व वाले अनुसंधान, नवाचार और स्टार्ट-अप संस्कृति के विस्तार पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य शैक्षणिक अनुसंधान और व्यावहारिक जीवन के अनुप्रयोगों के मध्य सेतु निर्माण करना तथा विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक से परे जाकर सृजनशील, आत्मनिर्भर और सतत विकासशील भारत के निर्माण हेतु प्रेरित करना है।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. अविनाश चंद्र पांडे, निदेशक आई.यू.ए.सी. (नई दिल्ली) एवं मुख्य वक्ता डॉ. चंद्रशेखर बुद्ध, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुवादिनी एआई एवं मुख्य समन्वय अधिकारी एआईसीटीई (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) ने अपनी उपस्थिति से आयोजन की गरिमा को द्विगुणित किया।

प्रो. पांडे ने “आधुनिक भारत में सतत विकास और आत्मनिर्भरता” विषय पर अपने विवेचन में कहा कि भारत को उच्च तकनीकी उपकरणों विशेषकर सेमीकंडक्टर निर्माण हेतु प्रयुक्त अल्ट्रावायलेट लिथोग्राफी मशीनोंके लिए विदेशी निर्भरता से मुक्त होना चाहिए। उन्होंने युवा शोधार्थियों से आग्रह किया कि वे सैद्धांतिक ज्ञान के साथ प्रायोगिक, अनुप्रयोग-उन्मुख अनुसंधान को जोड़ें, ताकि विज्ञान और तकनीक समाज के वास्तविक विकास में सहायक बनें।

डाॅ. बुद्ध ने “कौशल को पूंजी में रूपांतरित करना” विषय पर अपने प्रेरक वक्तव्य में कहा कि भारत प्रतिभा और नवाचार का भंडार है, किंतु उस ऊर्जा को सार्थक परिणामों में रूपांतरित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बल दिया कि एन.ई.पी. 2020 के अंतर्गत शिक्षा केवल ज्ञानार्जन का माध्यम न होकर, कौशल, नवाचार एवं उद्यमिता का संवाहक बने। उनके शब्दों ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे ज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपभोक्ता नहीं, बल्कि सृजक बनें।

1 नवम्बर 2025 को आयोजित समापन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. के. जी. सुरेश, निदेशक इंडिया हैबिटैट सेंटर, नई दिल्ली ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि श्याम लाल कॉलेज ने सदैव अनुसंधान एवं नवाचार की परंपरा को जीवंत रखा है। उन्होंने कहा कि कॉलेज से उपजे अनेक स्टार्ट-अप्स इसकी रचनात्मक दृष्टि और संस्थागत उत्कृष्टता के सशक्त उदाहरण हैं।

सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण “आइडिया, इन्क्यूबेशन एंड प्रेजेंटेशन” सत्र रहा, जिसमें नवोन्मेषकों एवं युवा उद्यमियों ने अपने अभिनव विचार प्रस्तुत किए और विशेषज्ञों के साथ सार्थक संवाद स्थापित किया।

कॉलेज के प्राचार्य प्रो. रबी नारायण कर ने विद्यार्थियों की जिज्ञासा, सृजनशीलता एवं अनुसंधान भावना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, स्वतंत्र चिंतन एवं नवाचार-चेतना का विकास करते हैं।

यह सम्मेलन आईक्यूएसी (प्रो. कुशा तिवारी एवं डॉ. नीति अग्रवाल), अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा आई.आई.सी. (डॉ. सौभाग्य लक्ष्मी सिंह) के संयुक्त प्रयासों से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

इस आयोजन ने अकादमिक जगत, उद्योग क्षेत्र और युवा नवप्रवर्तकों को एक साझा मंच पर लाकर शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के त्रिवेणी संगम का सृजन किया।

एस.आर.आई.एन.ई.पी. 2025 ने वास्तव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना को प्रेरित किया जहां शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं बल्कि कौशल-आधारित अधिगम, अनुसंधान उत्कृष्टता एवं उद्यमिता संवर्द्धन है।

यह आयोजन न केवल विचारों का उत्सव रहा बल्कि “विकसित भारत” के स्वप्न को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हुआ।

By editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights