नई दिल्ली, 12 मार्च । केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज देश के कृषि वैज्ञानिकों में महिला वैज्ञानिकों की संख्या 41 प्रतिशत हो गई है। कृषि शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का ये प्रमाण है। मोदी सरकार में महिला सशक्तिकरण के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहा है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन (जीसीडब्ल्यूएएस-2026) के उद्घाटन सत्र में शिरकत करते हुए अपने शिवराज सिंह ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और कृषि कार्य में महिलाएं अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। आज देश में 10 करोड़ बहनों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। तीन करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है और अब तीन करोड़ अतिरिक्त लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस कार्य के पूर्ण होते ही लखपति दीदीयों की संख्या 6 करोड़ हो जाएगी।
आज देश में महिलाएं ड्रोन दीदी, बैंक दीदी बनकर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सकारात्मक भागीदारी सुनिश्चित कर रही हैं।
इससे पहले कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन का शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के द्वारा किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बुवाई, कटाई, प्रसंस्करण और फसलों को बाजार तक पहुंचाने सहित कृषि संबंधी सभी गतिविधियों में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, वन उत्पादों के समुचित इस्तेमाल और कृषि आधारित उद्यमों के संचालन सहित कई क्षेत्रों में अथक परिश्रम करती हैं। कृषि अर्थव्यवस्था में महिलाओं का अमूल्य योगदान है।
राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों में कुल छात्रों में 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं और कई विश्वविद्यालयों में यह संख्या 60 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा कि ये सभी हितधारकों का दायित्व है कि वे इन होनहार लड़कियों को कृषि तथा अनाज उत्पादन के क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करने के लिए हर संभव सहायता और प्रोत्साहन दें। उन्होंने कहा कि नेतृत्व मातृत्व का अंतर्निहित गुण है।
ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ के अध्यक्ष डॉ. आर. एस. परोदा ने कहा कि यह सम्मेलन कृषि मूल्य श्रृंखला के विभिन्न चरणों- उत्पादन, फसलोपरांत प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और बेहतर बाज़ार संपर्कमें महिलाओं की परिवर्तनकारी भूमिका को पहचानने और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक आंदोलन की शुरुआत है।
रवांडा की कनेक्ट4 इम्पैक्ट एडवाइजरी ग्रुप की संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. एग्नेस कालीबाता ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना केवल निष्पक्षता और न्याय का विषय नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, लचीलापन और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में एक रणनीतिक निवेश भी है।
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