मुख्य अतिथि डॉ. अजय गुप्ता ने कहा कि मधुमेह, रक्तचाप और मोटापा जैसी बीमारियाँ जीवनशैली पर आधारित हैं। आयुर्वेद हमें सही आहार और दिनचर्या से इनसे बचने की शिक्षा देता है। ऋषि कुल आयुर्वेद फार्मेसी के प्रभारी तथा निर्माण वैद्य डॉ. अवनीश उपाध्याय ने कहा कि आयुर्वेद केवल प्राचीन ज्ञान नहीं, बल्कि आधुनिक युग तक प्रवाहित होती परंपरा है। चरक और सुश्रुत से लेकर आधुनिक प्रयोगशालाओं तक इसकी वैज्ञानिक यात्रा आज भी जारी है।

संगोष्ठी के अध्यक्ष डॉ. अशोक तिवारी ने कहा कि आयुर्वेदिक संहिताएँ प्रमाणों पर आधारित हैं। इनमें रोगों की रोकथाम और उपचार दोनों का स्पष्ट विवरण है। उन्होंने कुटी प्रावेशिक चिकित्सा का उदाहरण दिया।

इस अवसर पर डॉ. अतुल नेगी ने आयुर्वेद आधारित आहार-पेय को कार्यक्रमों का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया। डॉ. घनेन्द्र वशिष्ठ ने रामचरितमानस में वर्णित चिकित्सा पद्धतियों का महत्व बताया। संचालन डॉ. मनीषा चौहान ने किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता अधीक्षक डॉ. अशोक तिवारी और उप जिला अधिकारी डॉ. अतुल नेगी ने की। मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) अजय कुमार गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं विभागाध्यक्ष (शल्य), ऋषिकुल परिसर रहे। विशिष्ट अतिथि डॉ. अवनीश उपाध्याय, अध्यक्ष जिला आयुर्वेदिक संघ व अतिविशिष्ट अतिथि अग्रवाल, संचालक साईं वेदा वैलनेस उपस्थित रहे।

संगोष्ठी में डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. विक्रम रावत, डॉ. नवीन कुमार दास, डॉ. भास्कर आनंद, डॉ. विकास दुबे, डॉ. विश्वजीत मांझी, डॉ. मनीष गुप्ता, डॉ. अश्वनी कौशिक, डॉ. वीरेंद्र रावत, डॉ. रेनू सिंह, डॉ. सुजाता, डॉ. दीक्षा शर्मा, डॉ. सोरमी, डॉ. सुष्मिता, डॉ. करुणा नेगी, प्रबंधक डॉ. दीपिका वर्मा और स्नातकोत्तर विभाग के छात्र-छात्राएँ मौजूद रहे।

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