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एससी-एसटी एक्ट पर राजस्थान हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को ‘नीच’ जैसे सामान्य अपमानजनक शब्द कह देने भर से एससी-एसटी एक्ट अपने-आप लागू नहीं हो जाता। जस्टिस वीरेन्द्र कुमार ने मामले में स्पष्ट किया कि यह एक्ट तभी लगाया जा सकता है।

SC-ST एक्ट के दुरुपयोग को लेकर अक्सर कई मामले सामने आते रहते हैं। ताजा उदाहरण बिहार में देखने को मिला था। एक गांव में 100 लोगों पर एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया, जबकि दावा किया इसमें कई लोग दिल्ली में नौकरी कर रहे थे। एससी-एसटी एक्ट का एक मामला राजस्थान हाई कोर्ट पहुंचा।

साल 2011 में आईआईटी जोधपुर में सरकारी अधिकारी अतिक्रमण की जांच के लिए पहुंचे थे। जांच के दौरान कुछ लोगों ने अधिकारी का विरोध किया। जानकारी के अनुसार, कथित रूप से अधिकारियों को ‘नीच’ और ‘भिखारी’ जैसे शब्द कहे। इन शब्दों को अधिकारियों ने जातिगत अपमान मानते हुए मुकदमा दर्ज कराया। इसमें एससी-एसटी एक्ट की धारा भी जोड़ी गईं थीं।

मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब यह साबित हो कि अपमान खास तौर पर जाति के आधार पर किया गया था। साथ ही आरोपी को पीड़ित की जाति की जानकारी थी।

मामले में हाई कोर्ट में आरोपियों ने दलील दी कि उन्हें अधिकारियों की जाति के बारे में जानकारी नहीं थी। बोले गए शब्द जाति का संकेत नहीं करते हैं। कहा कि घटना के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था, इसलिए इसे जातिगत अपमान नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट के जज ने सुनवाई के दौरान पाया कि इस्तेमाल किए गए शब्द किसी विशेष जाति की ओर संकेत नहीं करते है। ना ही ऐसा कोई प्रमाण है कि आरोपियों को अधिकारियों की जाति के बारे में जानकारी थी।

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