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उच्चतम न्यायालय ने 18 अगस्त, 2024 को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। नौ अगस्त, 2024 को कोलकाता के आरजी कर अस्पताल के सेमिनार हॉल में पीजी ट्रेनी डॉक्टर का शव मिला था। 10 अगस्त, 2024 को इस मामले में एक सिविल वालंटियर को गिरफ्तार किया गया था। इस घटना के बाद पूरे देश में उबाल आ गया था और देशभर में डॉक्टरों ने आंदोलन किया था।

कोलकाता के ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपित संजय राय को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उच्चतम न्यायालय ने 20 अगस्त 2024 को डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और काम के लिए सुविधाजनक माहौल बनाने को लेकर अपने सुझाव देने के लिए नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया था। उच्चतम न्यायालय ने टास्क फोर्स गठित की थी, जिसका सदस्य वाइस एडमिरल सर्जन आरके सरीन, एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल गैस्ट्रोलॉजी के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. रेड्डी, एम्स दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. एम श्रीवास, निमहंस बैंगलुरु के डॉ. प्रतिमा मूर्ति, एम्स जोधपुर के डायरेक्टर डॉ. पुरी, गंगाराम अस्पताल के एमडी डॉ. रावत, एक्स के कार्डियोलॉजी के प्रमुख प्रो. अनिता सक्सेना, मुंबई मेडिकल कॉलेज के डीन प्रो. पल्लवी सप्रे और एम्स के न्यूरोलॉजी डॉ. पद्मा श्रीवास्तव को बनाया गया था।

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