अधिवक्ता शंकरनारायणन ने कहा कि अनुच्छेद 370 पर फैसला देते समय उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा समयबद्ध तरीके से बहाल करने का निर्देश दिया था। दो महीने के भीतर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने का केंद्र को निर्देश देने की मांग वाली याचिका में सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए आश्वासन का हवाला देते हुए कहा गया है कि सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया था कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा।

याचिका कॉलेज शिक्षक जहूर अहमद भट्ट और एक्टिविस्ट खुर्शीद अहमद मलिक ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से हुए। इससे यह पता चलता है कि राज्य का दर्जा बहाल करने में कोई समस्या नहीं है। याचिका में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल न करना संघवाद की मूल विशेषता का उल्लंघन है।

याचिका में कहा गया है कि सॉलिसिटर जनरल के दिए गए आश्वासन और अनुच्छेद 370 के मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद पिछले 11 महीने से इस संबंध में केंद्र की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है।

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