मुंबई, 07 नवंबर । रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय बैंक सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहा है, लेकिन हाल ही में बैंकों की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले नियमों में ढील दी गई है। उन्‍होंने कहा कि आरबीआई के नियामक सुधारों के कारण एसबीआई 2018 में घाटे से उबरकर 100 अरब डॉलर की कंपनी बन गई है।

संजय मल्‍होत्रा ने आर्थिक राजधानी मुंबई में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के बैंकिंग बैंकिंग और इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव 2025 को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि नियामकों को ऋण और जमा विस्तार, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और लाभप्रदता के साथ-साथ परिसंपत्तियों और इक्विटी पर रिटर्न में वृद्धि को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने आगे कहा कि हमें विनियमित संस्थाओं को प्रत्येक मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने की अनुमति देनी चाहिए।

संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय बैंक आज एक दशक पहले की तुलना में कहीं अधिक परिपक्व हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक का उद्देश्य चीजों का सूक्ष्म प्रबंधन करना नहीं है। भारत के बैंकिंग क्षेत्र में परिवर्तन एक मजबूत नियामक ढांचे और आरबीआई और सरकार द्वारा शुरू किए गए प्रमुख नीतिगत उपायों से संभव हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी नियामक को बोर्डरूम के फैसले का स्थान नहीं लेना चाहिए और प्रत्येक मामले को एक विनियमित संस्था द्वारा योग्यता के आधार पर देखा जाना चाहिए।

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