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नई दिल्ली, 03 दिसंबर । मुद्रा बाजार में आज लगातार तीसरे दिन रुपये ने डॉलर की तुलना में ऑल टाइम लो का नया रिकॉर्ड बनाया। मुद्रा बाजार के इतिहास में पहली बार भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 90 रुपये के स्तर को पार कर गई। दिन के कारोबार में भारतीय मुद्रा लुढ़क कर 90.29 रुपये प्रति डॉलर के अभी तक सबसे निचले स्तर तक पहुंची। हालांकि, बाद में डॉलर की मांग घटने पर रुपये की स्थिति में मामूली सुधार भी हुआ। पूरे दिन के कारोबार के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले 30 पैसे की कमजोरी के साथ 90.18 (अनंतिम) के स्तर पर बंद हुआ। इसके पहले पिछले कारोबारी दिन मंगवार को भारतीय मुद्रा 89.88 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था।

रुपये ने आज के कारोबार की शुरुआत भी गिरावट के साथ ही की थी। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में भारतीय मुद्रा ने आज सुबह डॉलर के मुकाबले 8 पैसे की कमजोरी के साथ 89.96 रुपये के स्तर से कारोबार की शुरुआत की थी। आज का कारोबार शुरू होने के बाद रुपये पर लगातार दबाव बढ़ता चला गया, जिसकी वजह से भारतीय मुद्रा 41 पैसे की कमजोरी के साथ अभी तक के सबसे निचले स्तर 90.29 रुपये प्रति डॉलर तक गिर गई। हालांकि दिन के दूसरे सत्र में डॉलर की मांग में कमी आने पर रुपये की स्थिति में कुछ सुधार हुआ, जिससे इसने 90.18 (अनंतिम) के स्तर पर आज के कारोबार का अंत किया।

मुद्रा बाजार के आज के कारोबार में रुपये ने डॉलर के साथ ही ज्यादातर दूसरी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले भी कमजोर प्रदर्शन किया। आज के कारोबार के बाद ब्रिटिश पौंड (जीबीपी) की तुलना में रुपया 102.45 पैसे की कमजोरी के साथ 119.76 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह यूरो की तुलना में रुपया आज 68.61 पैसे की गिरावट के साथ 105.04 (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच कर बंद हुआ।

खुराना सिक्योरिटीज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ रवि चंदर खुराना के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी हलचल और अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक लगातार भारत से अपने पैसे की निकासी करने में लगे हुए हैं। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमत में तेजी आने, स्टॉक मार्केट में बिकवाली का दबाव बनने और बैंकों द्वारा ऊंचे स्तर पर डॉलर की खरीदारी करने की वजह से भी आज लगातार रुपये पर दबाव बना रहा। खुराना के अनुसार शुक्रवार को मौद्रिक नीति का ऐलान होने के बाद रिजर्व बैंक रुपये को सपोर्ट करने के लिए मुद्रा बाजार में डॉलर का प्रवाह बढ़ा सकता है। ऐसा होने पर ही रुपये की स्थिति में कुछ सुधार की संभावना बन पाएगी।

By editor

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