कोर्ट ने आरोपित को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 302 के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट दोषी की सजा की अवधि पर 7 नवंबर को फैसला सुनाएगा।

घटना 2017 की है जिसमें फुटपाथ पर जीवन-यापन कर रही 60 वर्षीय एक मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को आरोपित ने अपनी बर्बरता का शिकार बनाया। मामले की जांच में सामने आया कि आरोपित ने न केवल महिला के साथ दुष्कर्म किया, बल्कि लोहे की रॉड से उस पर अमानवीय हमला किया।

मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक रॉड से महिला के आंतरिक और बाहरी अंगों पर गंभीर चोटें आई थीं, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गयी। वारदात के समय आरोपित की उम्र 16 साल, 11 महीने और 22 दिन थी।

पहले ये मामला किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष आया। किशोर न्याय बोर्ड ने अपराध की क्रूरता, आरोपित की मानसिक स्थिति और अपराध करने की समझ को देखते हुए आरोपित के खिलाफ बालिग की तरह मुकदमा चलाने का आदेश दिया। किशोर न्याय बोर्ड के इस फैसले को रोहिणी कोर्ट ने भी बरकरार रखा। रोहिणी कोर्ट ने कहा कि आरोपित की नीयत स्पष्ट रूप से हत्या करने की थी और उसने क्रूरता की सभी सीमाएं पार कर दीं। कोर्ट ने इस अपराध को रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में माना।

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