काेठा सरकार की जयंती पर पुलकित रहा रसमाेदकुंज

अयोध्या, 2 मई (हि.स.)। वैशाख शुक्ल पंचमी तिथि पर प्रसिद्ध पीठ रसमाेदकुंज, गाेलाघाट में स्वामी रामकिशाेर शरण महाराज उर्फ काेठा सरकार की जयंती हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई। इनका उपनाम रसमाेद लता जू था। रसमाेदकुंज के संस्थापक स्वामी शत्रुहन शरण उर्फ रसकांती लता जू, जिन्हें लाेग बिराैली सरकार के नाम से भी जानते थे। उन्होंने अपने बिराैली ग्राम के एक संत जनक नंदिनी शरण से मंत्र दीक्षा ली और अयोध्या आ गए। । उन्होंने अपने संबंध गुरु के नाम पर आश्रम का नाम रसमाेदकुंज रखा। महाेत्सव काे रसमाेदकुंज के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत रामप्रिया शरण गिरधारी महाराज ने अपनी सानिध्यता प्रदान की। सर्वप्रथम मंदिर के गर्भगृह में विराजमान रसमाेदकुंज बिहारिणी-बिहारी जू का सुबह अभिषेक-पूजन किया गया। भगवान का दिव्य श्रृंगार कर विविध पकवानाें का भाेग लगाया और महाआरती उतारी। अंत में साधु-संत एवं भक्तजनों को भगवान के भाेग का प्रसाद वितरित हुआ।

सायंकाल भगवान के पूजन-अर्चन, भाेग, आरती पश्चात काेठा सरकार की जन्म बधाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जन्म बधाई में अयोध्याधाम के नामी-गिरामी कलाकारों ने मंदिर के पूर्वाचार्याें द्वारा रचित पद गाकर चार-चांद लगा दिया। कलाकारों ने उत्सव की महफिल सजा दी। इससे उपस्थित साधु-संत व भक्तजन मंत्रमुग्ध हो गए। पीठ के पीठाधिपति महंत रामप्रिया शरण गिरधारी महाराज ने कलाकारों को नेग-न्याैछावर भी भेंट किया।

उन्होंने कहा कि आश्रम में काेठा सरकार की जयंती धूमधाम से मनाई गई। जाे हर वर्ष वैशाख शुक्ल पंचमी काे मनाया जाता है। काेठा सरकार भजनानंदी संत रहे। जाे भजन-साधना में तल्लीन रहा करते थे। उनकी भगवान सीताराम के प्रति अटूट भक्ति रही। वह सीताराम भगवान के अनन्य उपासक थे। उनका जीवन बहुत ही सरल था। जाे काेठे पर रहते थे। इसी कारण उनका नाम काेठा सरकार पड़ गया। उन्हें लाेग इसी नाम से जानने व पहचानने लगे। वह काेठा सरकार के नाम से पूरी रामनगरी समेत अन्य जगहों पर प्रसिद्ध हाे गए। इस अवसर पर साधु-संत समेत काफी संख्या में भक्तजन माैजूद रहे।

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