प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा के सेवानिवृत्त सदस्यों के योगदान की तारीफ करते हुए संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की। विदाई सत्र के दौरान बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उच्च सदन एक सतत संस्था है जहां अनुभव और ज्ञान अमूल्य हैं। सदस्यों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राजनीति में कोई विराम नहीं है। इस बात पर जोर देते हुए कि लोक सेवा का सफर औपचारिक कार्यकाल के बाद भी जारी रहता है। उन्होंने अनुभवी नेताओं से सीखने के महत्व पर भी बल दिया और कहा कि युवा सदस्यों को अनुभवी सांसदों से प्रेरणा और मार्गदर्शन लेना चाहिए।
मोदी ने कहा कि सदन के अंदर अनेक विषयों पर चर्चाएं होती हैं, हर किसी का महत्वपूर्ण योगदान होता है, कुछ खट्टे मीठे अनुभव भी रहते हैं। लेकिन, जब ऐसा अवसर आता है, तो स्वाभाविक रूप से दलगत भावना से ऊपर उठकर हम सबके भीतर एक समान भाव प्रकट होता है कि हमारे ये साथी अब किसी और विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज यहां से जो साथी विदाई ले रहे हैं, उनमें से कुछ फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं और कुछ विदाई के बाद यहां का अनुभव लेकर सामाजिक जीवन में कुछ न कुछ विशेष योगदान के लिए जा रहे हैं। जो जा रहे हैं, लेकिन आने वाले नहीं हैं, उनको भी मैं कहना चाहूंगा कि राजनीति में कोई फुलस्टॉप नहीं होता है, भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है और आपका अनुभव, आपका योगदान राष्ट्र जीवन में हमेशा बना रहेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सदन से आज जो भी हमारे सदस्य विदाई ले रहे हैं, उनमें से कुछ सदस्य ऐसे हैं, जिनका शायद उस समय जाने का कार्यकाल आएगा, जब सदन नहीं चल रहा होगा। कुछ ऐसे हैं, जिन्हें already सदन के दौरान ही विदाई मिल रही है। उन्होंने कहा कि मैं जरूर कहूंगा कि आदरणीय देवेगौड़ा जी, आदरणीय खड़गे जी, आदरणीय शरद पवार जी ऐसे वरिष्ठ लोग हैं, जिनके जीवन की आधे से अधिक उम्र संसदीय कार्यप्रणाली में गई है और इतने लंबे अनुभव के बाद भी सभी नए सांसदों को इनसे सीखना चाहिए कि समर्पित भाव से सदन में आना, जो उनसे बन सकता है, उतना योगदान करना। यानी समाज में से जो जिम्मेदारी मिली है, उसके प्रति पूरी तरह समर्पित रहना। ये इन सब वरिष्ठ लोगों से हम जैसे सबको सीखना चाहिए। मैं उनके योगदान की भूरि-भूरि सराहना करूंगा।
मोगी ने कहा कि उसी प्रकार से हमारे उप सभापति हरिवंश जी विदाई ले रहे हैं। हरिवंश जी को लंबे समय तक इस सदन में अपनी जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिला है। ये बहुत ही मृदुभाषी हैं और सदन को चलाने में सबका विश्वास जीतने का इन्होंने निरंतर प्रयास किया है। इस सदन में से हर 2 साल के अंतराल के बाद एक बड़ा समूह हमारे बीच से जाता है। लेकिन ये ऐसी व्यवस्था है कि जो नया समूह आता है, उनको 4 साल से यहां बैठे साथियों से कुछ न कुछ सीखने का अवसर मिलता है। इसलिए एक प्रकार से यहां की विरासत एक प्रक्रिया जारी रहती है। मुझे विश्वास है कि जिनको इस बार जाना नहीं हैं, आने वाले नए सांसदों को उनके अनुभव का लाभ मिलेगा और उनका योगदान भी सदन को और समृद्ध करेगा।
