नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल के कई जिलों में सोमवार रात से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राजधानी कोलकाता की सड़कें नदी में तब्दील हो गईं, जगह-जगह पानी भर जाने से गाड़ियाँ घंटों जाम में फंसी रहीं और कई इलाकों में घरों के अंदर तक पानी घुस गया। भारी बारिश के कारण सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें ज्यादातर की जान बिजली के करंट लगने से गई है।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के चलते बारिश का दौर अभी और जारी रह सकता है।लगातार बारिश से रेलवे और मेट्रो सेवाएँ भी प्रभावित हुई हैं। कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, वहीं कई रूटों पर मेट्रो सेवा बाधित रही। सड़कों पर जलभराव और पेड़ गिरने की वजह से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमराकर रह गई है। शहर के कई हिस्सों में बिजली गुल हो गई, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों को 24 और 25 सितंबर को बंद रखने का आदेश दिया है। यह छुट्टियाँ दुर्गा पूजा अवकाश से पहले दी जा रही हैं, ताकि बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। निजी स्कूलों को भी सुरक्षा कारणों से छुट्टी घोषित करने या ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कराने की सलाह दी गई है।मंदिरों, बाजारों और मुख्य सड़कों पर जलभराव की वजह से दुकानदारों और व्यापारियों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच बारिश ने आयोजन समितियों को भी मुश्किल में डाल दिया है। कई जगह पंडालों में पानी भर जाने से उनका निर्माण कार्य रुक गया है।नगर निगम और आपदा प्रबंधन की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। जलनिकासी के लिए पंपिंग स्टेशन लगातार चलाए जा रहे हैं, लेकिन बारिश की रफ्तार इतनी तेज है कि सड़कों से पानी कम होने का नाम नहीं ले रहा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक घर से बाहर न निकलें, जलभराव वाली जगहों से दूर रहें और किसी भी तरह की बिजली से जुड़ी समस्या होने पर तुरंत विभाग को सूचित करें।बारिश ने दुर्गा पूजा से पहले ही बंगाल में हड़कंप मचा दिया है। आम लोग जहां घरों में कैद होने को मजबूर हैं, वहीं प्रशासन अलर्ट मोड पर है। सड़क से लेकर रेल और हवाई यात्रा तक सब प्रभावित होने के चलते राज्य में हालात सामान्य होने में समय लग सकता है।

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