पूर्व कैबिनेट मंत्री और राज्य आंदोलन में फील्ड मार्शल की उपाधि पाने वाले दिवाकर भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने के लिए यूकेडी ने आंदोलन किया और अनेक कुर्बानियों के बाद उत्तराखंड राज्य वजूद में आया। अब राज्य बचाने को लेकर आंदोलन करना पड़ेगा।

पत्रकारों से वार्ता में दिवाकर भट्ट ने कहा कि अलग राज्य को लेकर लोगों की जो आकांक्षाएं थी वह पूरी नहीं हो पायी हैं। भट्ट ने कहा कि पहले राज्य के लोगों को जागरूक किया जाएगा और उसके बाद आंदोलन की तैयारी की जाएगी।

दिवाकर भट्ट ने कहा कि राज्य से पलायन की स्थिति चिंताजनक है। सैकड़ां गांवों को शहरी क्षेत्र में लाना पड़ा है। रोजगार के साधन नहीं होने से पढ़ा लिखा युवा राज्य से पलायन कर रहा है। यह बहुत गंभीर मुद्दा है। जल जंगल जमीन बचाने के लिए संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में अनेक उत्पाद होने के बाद भी सही तरीके से प्रदेश के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। बिजली पानी से ही राज्य की प्रगति बढ़ायी जा सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बेहद खराब है। सरकारों पर राज्य के विकास के प्रति उदासीनता बरतने का आरोप लगाते हुए दिवाकर भट्ट ने कहा कि 25 वर्ष बाद भी पलायन नहीं रोका जा सका है। क्या ऐसे राज्य की कल्पना आंदोलनकारियों ने की थी।

इस अवसर पर रविन्द्र वशिष्ठ, मोहन सिंह असवाल, ललित बिष्ट, सुरेन्द्र भंडारी, करन सिंह बर्त्वाल, कुंवर सिंह राणा, जयप्रकाश उपाध्याय, देवचंद उत्तराखण्डी आदि मौजूद रहे।

By editor

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