अप्टमी के दिन से हो अंतरविद्यालयी लोक नृत्य प्रतियोगिता की शुरुआत होगी। इस बार भी महिलाओं की झोड़ा प्रतियोगिता, मेहंदी, ऐपण, चित्रकला, कुमाउनी व्यंजन, मांगल गीत, विवाह गीत, फैंसी ड्रेस, पारंपरिक परिधान आदि प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा। महोत्सव का समापन तीन सितंबर को मां नंदा सुन॑दा के डोले की भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा के साथ होगा।
स्कूली सांस्कृतिक शोभायात्रा श्री शिव मंदिर से शुरू की जाएगी जो नगर में पारंपरिक उल्लास के साथ भ्रमण करेगी। बैठक में सभी आयोजनों के संचालन के लिए अलग-अलग समितियां गठित करने, प्रयोजक तलाशने व अगस्त के प्रथम सप्ताह में मेला संचालकों को आमंत्रित कर विशेष बैठक आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया।
इस संबध में अल्मोड़ा के नंदा देवी मंदिर के पुजारी हरिश जोशी ने बताया कि यह महोत्सव सिर्फ धार्मिक अंश नहीं है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का भी प्रतीक है, जो समुदाय को एक साथ लाता है। यह उत्तराखंड की संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक है। जो रानीखेत में इस बार 28 अगस्त से शुरु होगा।
