प्रधानमंत्री मोदी सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ लेंगे रणनीतिक परिषद की दूसरी बैठक में भाग

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिवसीय (22-23 अप्रैल) सऊदी अरब यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वह क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान के साथ क्षेत्रीय और विश्व मामलों पर विचार-विमर्श करेंगे। दोनों नेता भारत-सऊदी अरब की रणनीतिक साझेदारी परिषद की दूसरी बैठक में भाग लेंगे। परिषद की पहली बैठक क्राउन प्रिंस की 2023 में हुई यात्रा के दौरान हुई थी।

प्रधानमंत्री मोदी और क्राउन प्रिंस के बीच इजराइल-फिलिस्तीन से जुड़ी पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार-विमर्श होगा तथा लाल सागर में नौवहन सुरक्षा पर खतरे पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में कुछ करार होने की भी संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के बारे में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पत्रकार वार्ता की। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा संपर्क का विस्तार हुआ है तथा स्थल और नौसेना के संयुक्त अभ्यास हुए हैं।

उन्होंने कहा कि लाल सागर में हुती विद्रोहियों के हमलों से नौवहन को उत्पन्न खतरे को लेकर भारत चिंतित है। लाल सागर रणनीतिक महत्व का क्षेत्र है। भारत और पश्चिम एशिया के बीच प्रस्तावित आईएमईसी (भारत-पश्चिम एशिया परिवहन कोरिडोर) के बारे में पूछे गए एक सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के घटनाक्रम से इसपर असर पड़ा है लेकिन संबंधित देश इस परियोजना पर विचार-विमर्श करते रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में जी20 शिखरवार्ता के इतर आईएमईसी परियोजना की घोषणा की गई थी। भारत, सऊदी अरब, यूएई और इजरायल को इसमें शामिल होना है।

विदेश सचिव ने कहा कि सऊदी अरब ने बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए भारतीय मिशन सक्रिय है। प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान उस फैक्ट्री में जायेंगे जहां बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं।

विदेश सचिव ने भारतीय हज यात्रियों के कोटे को बढ़ाने के लिए उसका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक के दौरान हज कोटे में बराबर बढ़ोतरी होती रही है। उन्होंने बताया कि कुल एक लाख 75 हजार हज यात्रियों में से 1, 22, 518 यात्रियों के कोटे का प्रबंधन विदेश मंत्रालय और हज कमेटियां करती हैं, जबकि शेष करीब 52 हजार के कोटे का प्रबंधन निजी ऑपरेटरों की ओर से होता है।

उल्लेखनीय है कि निजी ऑपरेटरों की ओर से समय से औपचारिकताएं पूरी नहीं करने पर सऊदी अरब की ओर से उन्हें दिए गए कोटे का उपयोग नहीं हो पाया था।

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