प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला डी सिल्वा के बीच मंगलवार को वार्ता के बाद भारत और ब्राजील ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को लगभग दोगुना करके 20 अरब अमेरिकी डॉलर वार्षिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया।

साथ ही दोनों देशों ने ऊर्जा और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद से निपटने पर भी विचार-विमर्श किया। मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर स्पष्ट हैं कि आतंकवाद पर दोहरे मानदंडों के लिए कोई जगह नहीं है।

मोदी ने मीडिया को दिये अपने बयान में कहा, ‘‘आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हमारी सोच एक जैसी है, यथा- आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति और यह कि इसे लेकर दोहरा मानदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम आतंकवाद और आतंकवाद का समर्थन करने वालों का कड़ा विरोध करते हैं।’’

दोनों देशों ने छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और सीमापार संगठित अपराध से मुकाबला करने संबंधी समझौता और गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान व पारस्परिक संरक्षण से जुड़ा करार शामिल है। 

इसके अलावा, दोनों पक्षों ने नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग, डिजिटल परिवर्तन के लिए बड़े पैमाने पर समाधान साझा करने, बौद्धिक संपदा, और कृषि अनुसंधान के क्षेत्रों में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए।

मोदी ब्राजील के समुद्र तटीय शहर रियो डी जेनेरियो में दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद सोमवार शाम ब्रासीलिया पहुंचे। 

मोदी ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि भारत-ब्राजील संबंध कार्निवल (रंगारंग जुलूस) की तरह रंगीन हों, फुटबॉल की तरह जोशीले हों, और सांबा (नृत्य) की तरह दिलों को जोड़ने वाले हों और वीजा काउंटर पर लंबी कतारें न हों। इस भावना के साथ।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम दोनों देशों के लोगों, खासकर पर्यटकों, छात्रों, खिलाड़ियों और व्यापारियों के बीच आपसी संपर्क को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रयास करेंगे।” 

विभिन्न भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-ब्राजील साझेदारी स्थिरता और संतुलन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और दोनों पक्ष इस बात पर एकमत हैं कि सभी विवादों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।

मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों ने व्यापार बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “आज की चर्चा में हमने हर क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर बात की। हमने आने वाले पांच सालों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।” 

मौजूदा वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार करीब 13 अरब डॉलर है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ऊर्जा के क्षेत्र में हमारा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। पर्यावरण और स्वच्छ ऊर्जा दोनों देशों की मुख्य प्राथमिकताएं हैं।” 

उन्होंने कहा, ‘‘इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए आज जो समझौता हुआ है, वह हमारे हरित लक्ष्यों को नयी दिशा और गति देगा।” 

प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में भारत-ब्राजील के बीच बढ़ता सहयोग दोनों पक्षों के बीच “गहरे आपसी विश्वास” का प्रतीक है। हम अपने रक्षा उद्योगों को जोड़ने के लिए अपने प्रयास जारी रखेंगे।’’

उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष ब्राजील में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) को अपनाने पर भी मिलकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भारत के सफल अनुभव को ब्राजील के साथ साझा करने में प्रसन्नता होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सुपर कंप्यूटर में हमारा सहयोग बढ़ रहा है। यह समावेशी विकास और मानव-केंद्रित नवाचार की हमारी साझा सोच का प्रमाण है।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष कृषि के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अब हम कृषि अनुसंधान और खाद्य प्रसंस्करण पर भी मिलकर काम करेंगे। हम स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अपने परस्पर लाभकारी सहयोग को बढ़ा रहे हैं। हमने ब्राजील में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा के विस्तार पर जोर दिया।’’

मोदी ने वैश्विक मंच पर भारत-ब्राजील समन्वय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘दो बड़े लोकतांत्रिक देशों के रूप में, हमारा सहयोग न केवल ग्लोबल साउथ के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रासंगिक है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम मानते हैं कि वैश्विक मंचों पर ग्लोबल साउथ की चिंताओं और प्राथमिकताओं को उठाना हमारा नैतिक दायित्व है।’’

उन्होंने कहा, “आज जब दुनिया तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, मेरे मित्र ने बहुत विस्तार से समझाया।” 

मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लूला के साथ अपनी बातचीत को “उपयोगी” बताया और कहा कि ब्राजील के राष्ट्रपति हमेशा से भारत-ब्राजील मैत्री के प्रति उत्साही रहे हैं। 

उन्होंने कहा, “हमारी बातचीत में व्यापार संबंधों को गहरा करने और द्विपक्षीय व्यापार में विविधता लाने के तरीकों पर चर्चा हुई। हम दोनों इस बात पर सहमत हैं कि आने वाले समय में इस तरह के संबंधों के पनपने की अपार संभावनाएं हैं।’’

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