मणिपुर में 3 मई 2023 से हिंसा शुरू हुई थी, जिसमें अब तक 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 60,000 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। प्रधानमंत्री के अब तक राज्य के दौरे पर नहीं आने के लिए विपक्ष और स्थानीय लोगों द्वारा उनकी आलोचना की जाती रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर के दूसरे सप्ताह में मणिपुर का दौरा कर सकते हैं। मणिपुर में दो वर्ष पहले मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़कने के बाद यह प्रधानमंत्री की इस पूर्वोत्तर राज्य की पहली यात्रा होगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री इम्फाल और चुराचांदपुर ज़िलों का दौरा करेंगे, जहाँ वह विस्थापित परिवारों से मिल सकते हैं और कुछ महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं का उद्घाटन तथा नई योजनाओं की घोषणा कर सकते हैं।

हम आपको याद दिला दें कि मणिपुर में 3 मई 2023 से हिंसा शुरू हुई थी, जिसमें अब तक 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 60,000 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। प्रधानमंत्री के अब तक राज्य के दौरे पर नहीं आने के लिए विपक्ष और स्थानीय लोगों द्वारा उनकी आलोचना की जाती रही है। खासकर कांग्रेस पार्टी की ओर से आये दिन प्रधानमंत्री से यही सवाल पूछा जाता है कि वह मणिपुर का दौरा कब करेंगे? ऐसे में प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल मानवीय दृष्टि से बल्कि राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।

हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री की यात्रा के मद्देनज़र सुरक्षा कड़ी की जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “किसी भी प्रकार की हिंसा भड़काने की कोशिश हो सकती है, लेकिन पूरे हालात पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।” हम आपको यह भी याद दिला दें कि राज्य में 13 फरवरी 2024 से राष्ट्रपति शासन लागू है, जिसे हाल ही में 5 अगस्त को छह महीने और बढ़ा दिया गया। हालांकि विधानसभा भंग नहीं की गई है और निर्वाचित सरकार की बहाली के प्रयास जारी हैं।

राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य में हिंसा की घटनाओं में कमी आई है। साथ ही पुलिस ने उगाही करने वाले संगठित गिरोहों पर कार्रवाई करते हुए 2023 में लूटी गई हथियारों की बड़ी खेप बरामद की है। हम आपको बता दें कि पुलिस शस्त्रागार से कुल 6,020 हथियार लूटे गए थे, जिनमें से करीब 3,000 अब तक बरामद हो चुके हैं। हम आपको यह भी बता दें कि प्रधानमंत्री का यह दौरा मिज़ोरम और असम की उनकी 12–14 सितंबर की यात्रा के दौरान होने की संभावना है। इन राज्यों में वह रेलवे और अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। 

जहां तक प्रधानमंत्री के मिजोरम दौरे की बात है तो आपको बता दें कि वह राज्य की पहली बड़ी रेलवे परियोजना का उद्घाटन करेंगे। इस परियोजना से मिज़ोरम सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे राज्य के लिए व्यापार, पर्यटन और आवागमन की संभावनाएँ व्यापक होंगी। प्रधानमंत्री के साथ कई केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहेंगे और क्षेत्र की अन्य आधारभूत परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी। नई रेलवे लाइन को पूर्वोत्तर के लिए एक “गेम चेंजर” माना जा रहा है। इसके जरिए न केवल मिज़ोरम का संपर्क बाकी भारत से आसान होगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों— जैसे बांस, अदरक और संतरे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचाना भी सरल हो जाएगा।

देखा जाये तो मोदी सरकार ने पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश की विकास धारा से जोड़ने पर विशेष बल दिया है। इसकी झलक सड़क, हवाई अड्डों और रेलवे जैसी परियोजनाओं में साफ दिखाई देती है। असम के बोगीबील ब्रिज, इम्फाल और आइज़ोल एयरपोर्ट का विस्तार और अब मिज़ोरम रेलवे प्रोजेक्ट, यह सब दर्शाता है कि केंद्र सरकार क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। कनेक्टिविटी सुधरने से पूर्वोत्तर की अनोखी संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता अब अधिक पर्यटकों तक पहुँच सकेगी। रेलवे और हवाई संपर्क बढ़ने से यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

देखा जाये तो प्रधानमंत्री मोदी का पूर्वोत्तर दौरा इस क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा में लाने और भारत की “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है। यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो पूर्वोत्तर आने वाले वर्षों में देश की नई विकास धुरी बन सकता है।

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