कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल खरीद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करने के बार-बार दावों पर केंद्र सरकार से सवाल किया। यह देखते हुए कि ट्रंप ने पिछले पांच दिनों में तीन बार अपने दावे दोहराए हैं, रमेश ने कहा कि इस सप्ताह के अंत में बुडापेस्ट में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की तैयारी के साथ यह संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

कांग्रेस ने दिवाली के अवसर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच फोन पर हुई बातचीत को लेकर बुधवार को कटाक्ष किया कि प्रधानमंत्री बातों को छुपा जाते हैं, वहीं ट्रंप उन्हें उजागर कर देते हैं। ट्रंप ने दिवाली के अवसर पर प्रधानमंत्री को फोन किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘प्रधानमंत्री ने आखिरकार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें फोन किया था और दोनों के बीच बातचीत हुई थी। लेकिन प्रधानमंत्री ने सिर्फ इतना बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने उन्हें दीवाली की शुभकामनाएं दीं।’’

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जहां प्रधानमंत्री मोदी बातों को छुपा जाते हैं, वहीं राष्ट्रपति ट्रंप उन्हें उजागर कर देते हैं। रमेश ने कहा, ‘‘अपनी ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि दिवाली की शुभकामनाओं के अलावा उन्होंने रूस से भारत के तेल आयात के बारे में भी बात की और उन्हें यह आश्वासन दिया गया कि ये आयात बंद कर दिए जाएंगे।’’ रमेश के मुताबिक, पिछले छह दिनों में यह चौथी बार है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत की नीति की घोषणा की है। उन्होंने कहा, ‘‘इससे पहले भी राष्ट्रपति ट्रंप ने 10 मई की शाम को ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी से पहले ही कर दी थी।’’

ट्रंप ने दिवाली के मौके पर व्हाइट हाउस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की है और भारत अब रूस से ज्यादा तेल नहीं खरीदेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘‘राष्ट्रपति ट्रंप आपके फोन करने और दिवाली की शुभकामनाएं देने के लिए धन्यवाद।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘रोशनी के इस पर्व पर दोनों महान लोकतंत्र दुनिया को आशा की किरण दिखाते रहें और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ एकजुट रहें।’’ दोनों नेताओं के बीच फोन पर यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब व्यापार शुल्क और अन्य मुद्दों को लेकर अमेरिका-भारत संबंधों में तल्खी है।

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