मुजफ्फरनगर। शुक्रवार का दिन मुजफ्फरनगर के जडौदा गांव के लिए खास रहा। होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज के विशाल सभागार में जब दीप प्रज्ज्वलन के साथ नेशनल इंस्टिट्यूट होलेस्टिक हेल्थ (एनआईएच) के सातवें स्थापना दिवस का शुभारंभ हुआ तो माहौल उम्मीद, ऊर्जा और सकारात्मकता से भर उठा। मंच पर बैठे विद्वान, चिकित्सक और सामाजिक कार्यकर्ता सभी एक ही संकल्प के साथ आगे बढ़े—स्वस्थ गांव ही स्वस्थ भारत की नींव रखेंगे और योग व नैचरोपैथी ही उस यात्रा का पथप्रदर्शन करेंगे।

कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिकता और उत्साह से भर दिया। साथ ही, संस्था ने योग और नैचरोपैथी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित कर उन्हें प्रेरणा और प्रोत्साहन का संदेश भी दिया।

एनआईएच के चेयरमैन डॉ. विनोद कश्यप ने भावपूर्ण संबोधन में कहा कि संस्था “स्वस्थ गांव, स्वस्थ भारत और चलो गांव की ओर” थीम पर निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि योग को केवल शहरों की दीवारों में कैद नहीं रहने देना है, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचाना है। “योग ही जीवन का आधार है। यदि हर व्यक्ति इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना ले तो न केवल बीमारियों से बचा जा सकता है बल्कि मानसिक शांति और जीवन का संतुलन भी प्राप्त होता है।

”डॉ. आर.एस. दवास ने कहा कि आज स्वास्थ्य जागरूकता को घर-घर ले जाना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि एनआईएच आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिक्षा और योगाभ्यास को लेकर बड़ी भूमिका निभाएगा।

आचार्य डॉ. चंद्रशेखर शास्त्री ने अपने संबोधन में प्राचीन भारत की ओर संकेत किया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल परंपरा में योग और आयुर्वेद हर परिवार का हिस्सा हुआ करते थे। अब समय है कि उस गौरवशाली परंपरा को फिर से जीवित किया जाए। उन्होंने आह्वान किया कि हर नागरिक योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाए।डॉ. पी.के. चौहान ने बताया कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत योग में अनेक पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनसे न केवल युवाओं को नया करियर विकल्प मिलेगा बल्कि जन-जन में योग के महत्व की समझ भी गहरी होगी। वहीं एडवोकेट पवन दूबे ने कार्यक्रम की सफलता और सातवें स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में नई ऊर्जा का संचार करते हैं।

इस अवसर पर ग्रीनलैंड जूनियर हाई स्कूल और होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज के साथ ही योगाचार्या सीमा सिंह के विद्यार्थियों ने योग का शानदार प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों की लचकदार मुद्राओं और सामूहिक योगाभ्यास ने यह संदेश दिया कि आने वाली पीढ़ी यदि योग से जुड़ी तो भारत वास्तव में विश्वगुरु बनने की राह पर और तेज़ी से आगे बढ़ेगा।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. राजीव कुमार ने किया। उन्होंने पूरे आयोजन को अनुशासन और सादगी के साथ जोड़कर ऐसा माहौल बनाया, जिसमें विद्वानों के विचार और बच्चों का प्रदर्शन एक-दूसरे के पूरक बन सके।समापन अवसर पर डॉ. कीर्तिवर्धन, संजीव अग्रवाल और प्रवेंद्र दहिया ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति स्वस्थ रहना चाहता है और इसके लिए जरूरी है कि वह प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाए। “उत्तम दिनचर्या, योग और नैचरोपैथी ही वह साधन हैं जिनसे न केवल बीमारी से बचा जा सकता है बल्कि जीवन को लंबा, सुखमय और आनंदमय बनाया जा सकता है।”कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भारत का भविष्य अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहेगा बल्कि आत्मअनुशासन और योगाभ्यास पर खड़ा होगा। यह आयोजन केवल एक स्थापना दिवस नहीं था बल्कि एक ऐसी पुकार थी जो हर नागरिक को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम स्वस्थ भारत की ओर अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं।

कार्यक्रम में शामिल होने वालों में आचार्य डॉ. चंद्रशेखर शास्त्री, डॉ. आर.एस. दवास, डॉ. राहुल बंसल, डॉ. पी.के. चौहान, एडवोकेट पवन दूबे, एनआईएच के चेयरमैन डॉ. विनोद कश्यप, मेरा वजूद फाउंडेशन के चेयरमैन प्रवेंद्र दहिया, संजीव अग्रवाल, डॉ. कीर्तिवर्धन अग्रवाल, डॉ. राजीव कुमार, अनिल कुमार शास्त्री, हेमंत चौधरी और आदित्य दहिया प्रमुख रूप से मौजूद रहे।इसके अलावा नैचरोपैथी और योग के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सुरेंद्र मान, सहदेव आर्य, सोनिया लुथरा, डॉ. धीरेंद्र गुप्ता, डॉ. हबीब रहमान, डॉ. सुनील राजपूत, आचार्य धीरज, योगाचार्य विश्वास त्यागी, देवेंद्र राणा, अनुज शर्मा, संजीव जलोत्रा, कुलदीप मित्तल, सीमा सिंह, डॉ. यशपाल सिंह, योगाचार्य सतकुमार और अन्य लगभग 60 लोगों को भी सम्मानित किया गया।

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