विकसित कृषि संकल्प अभियान में कृषि वैज्ञानिकों ने 11 दिनों में 44 हजार किसानों से किया संवाद

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों ने प्रतिदिन 54 किसान संवाद कार्यक्रमों में भागीदारी की

वाराणसी,09 जून (हि.स.)। कृषि मंत्रालय के पहल पर किसान कल्याण के लिए चलाये जा रहे देश व्यापी कार्यक्रम “विकसित कृषि संकल्प अभियान” में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों ने 11 दिनों में 44 हजार से अधिक किसानों से संवाद किया। इस अभियान में आईआईवीआर के 50 प्लस वैज्ञानिकों और 18 विशेषज्ञ की टीम ने कृषि विभाग के अफसरों के साथ मिलकर प्रतिदिन औसतन 4,400 प्लस किसानों से संपर्क किया।

आईआईवीआर के सुंदरपुर स्थित गेस्ट हाउस में सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता कर यह जानकारी आईसीएआर-आईआईवीआर के निदेशक डॉ राजेश कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के तत्वावधान में संचालित कार्यक्रमों ने गत ।। दिनों (29 मई से 8 जून) में उत्तर प्रदेश के छह जिलों में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। अभियान के दौरान आईआईवीआर के वैज्ञानिकों की टीमों ने कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों एवं राज्य सरकार के कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र, संत रविदासनगर और कुशीनगर जिलों के किसानों से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया। इस अभियान में 36 फीसद महिला सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो ग्रामीण महिलाओं के कृषि क्षेत्र में बढ़ते योगदान को बताती है।

उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 54 किसान संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से 15 से अधिक ब्लॉक के 65 से अधिक गांवों में धान की सीधी बुआई (डीएसआर), आईआईवीआर की उच्च उत्पादन किस्में, एकीकृत कीट प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, नैनो उर्वरक तकनीक, संरक्षित खेती, मूल्य संवर्धन, किचन गार्डनिंग, मशरूम खेती, मधुमक्खी पालन और ड्रोन तकनीक पर व्यापक प्रशिक्षण दिया गया। राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के साथ तालमेल बिठाते हुए जैविक कीट नियंत्रण और रासायनिक निर्भरता कम करने पर विशेष जोर दिया गया। कृषि क्षेत्र के मुख्य चुनौतियों में नीलगाय सहित वन्यजीवों से फसल सुरक्षा, जल संकट, सफेद मक्खी एवं जैसिड जैसे कीटों का प्रबंधन, बाजार पहुंच की कमी, गुणवत्तापूर्ण बीज की देर से आपूर्ति और सरकारी योजनाओं की जानकारी का अभाव प्रमुख है। इन समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए अल्पकालिक योजना में जैविक कीट नियंत्रण, फेरोमोन ट्रैप का व्यापक प्रयोग, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा, और प्रत्येक जिले में किसान उत्पादक संगठन शामिल हैं।

मध्यकालिक योजना में सभी छह जिलों में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापना, मोबाइल मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला और 1000 से अधिक प्रगतिशील किसानों को कृषि उद्यमी बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने बताया कि यह अभियान कृषि मंत्री की किसान आय दोगुनी करने, टिकाऊ कृषि, महिला सशक्तिकरण, तकनीक हस्तांतरण और जलवायु लचीली कृषि की दृष्टि के पूर्णतः अनुरूप है। आईआईवीआर की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता में राज्य सरकार के सहयोग से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग समूह स्थापित करना, 10,000 से अधिक ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना और कार्बन-तटस्थ कृषि की दिशा में कार्य करना शामिल है। वार्ता में प्रिंसिपल वैज्ञानिक डॉ डीपी सिंह व अन्य अफसर भी मौजूद रहे।

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