नई दिल्ली । नेपाल की राजधानी काठमांडू मंगलवार को बड़े हंगामे और डर से भर गई। हजारों की भीड़ ने संसद भवन पर धावा बोल दिया और इमारत के एक हिस्से में आग लगा दी। धुएं और लपटों के बीच अफरातफरी का माहौल बन गया। घटना के समय भवन में सांसद और कर्मचारी भी मौजूद थे, जिन्हें निकालने के लिए सुरक्षा बलों और बचाव दलों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।यह सब अचानक नहीं हुआ। पिछले कई दिनों से नेपाल में सोशल मीडिया बैन को लेकर गुस्सा बढ़ रहा था। सरकार ने फेसबुक, एक्स और यूट्यूब जैसे प्लेटफ़ॉर्मों पर रोक लगाने की कोशिश की। युवाओं को यह फैसला पसंद नहीं आया। खासकर नए दौर के छात्र और नौजवान इसे बोलने और लिखने की आज़ादी पर हमला मान रहे थे। देखते-ही-देखते राजधानी और देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।सोमवार को हालात और बिगड़े। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए, पानी की बौछार की गई और रबर की गोलियां भी चलाई गईं। कई जगह असली गोलियां चलने की खबरें भी सामने आईं। इस झड़प में कई लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हो गए।

माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद छोड़ना पड़ा। लेकिन इस्तीफ़े के बाद भी गुस्सा शांत नहीं हुआ।प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े की खबर आने के कुछ घंटे बाद प्रदर्शनकारी और ज्यादा भड़क उठे। भीड़ सिंहदरबार परिसर में घुस गई, जो नेपाल की सत्ता का बड़ा केंद्र है। वहां संसद भवन में आग लगा दी गई। लोगों ने बताया कि आग इतनी तेज थी कि इमारत के ऊपर से धुएं का गुबार साफ दिखाई दे रहा था।इसी बीच भीड़ ने कई नेताओं के घरों को भी निशाना बनाया। राष्ट्रपति, गृह मंत्री और कुछ अन्य नेताओं के निवास पर भी हमला हुआ और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। काठमांडू की सड़कों पर हर तरफ भगदड़ और दहशत का माहौल था। सरकार ने राजधानी में कर्फ्यू लगा दिया और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं। स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं और लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं।सरकार ने भारी दबाव में सोशल मीडिया पर लगाया गया बैन वापस ले लिया है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों इस्तीफ़ा दे चुके हैं। इसके बावजूद हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। संसद भवन में आगजनी और नेताओं के घरों पर हमलों ने नेपाल की राजनीति को गहरे संकट में धकेल दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर चिंता जताई जा रही है।काठमांडू में अब भी चारों तरफ सुरक्षा बल तैनात हैं। जगह-जगह सन्नाटा है, लेकिन माहौल असुरक्षा और डर से भरा हुआ है।

नेपाल का भविष्य अब किस ओर जाएगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन फिलहाल देश बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट के दौर से गुजर रहा है।

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