खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि निर्वासन नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है और इस प्रक्रिया को स्थगित नहीं किया जाएगा। इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रांडी ने अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में आए विनाशकारी भूकंप का हवाला देते हुए इस्लामाबाद से निर्वासन रोकने का आग्रह किया था।

अफगानिस्तान में मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने भी पाकिस्तान से निष्कासन में देरी करने की अपील की। इसके जवाब में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि निर्वासन तो जारी रहेगा, लेकिन देश कानूनी रूप से प्रवेश करने के इच्छुक अफगानों के लिए उदार वीजा नीति बनाए रखेगा।

पाकिस्तान ने बिना दस्तावेज वाले अफगान शरणार्थियों और जिनके अस्थायी निवास परमिट की अवधि समाप्त हो गई है, उनके लिए स्वेच्छा से देश छोड़ने की समय सीमा 1 सितंबर तय की थी। मानवाधिकार समूहों और शरणार्थी अधिवक्ताओं ने पाकिस्तान की सामूहिक निष्कासन योजना की बार-बार आलोचना की है।

पर्यवेक्षकों ने चेतावनी दी है कि संयुक्त राष्ट्र की अपीलों की अनदेखी करने से पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय संबंधों में और तनाव पैदा हो सकता है। साथ ही संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं के कारण पहले से ही विस्थापित अफगान शरणार्थियों के लिए मानवीय संकट और भी बदतर हो सकता है।

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By editor

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