नई दिल्ली, 29 अक्टूबर । ओर्कला इंडिया का 1,667.54 करोड़ रुपये का आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च कर दिया गया। लॉन्चिंग के बाद पहले दिन ही ये आईपीओ 78 प्रतिशत सब्सक्राइब हो गया। इस आईपीओ में 31 अक्टूबर तक बोली लगाई जा सकती है। इश्यू की क्लोजिंग के बाद 3 नवंबर को शेयरों का अलॉटमेंट किया जाएगा, जबकि 4 नवंबर को अलॉटेड शेयर डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे। कंपनी के शेयर 6 नवंबर को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे।

इस आईपीओ में बोली लगाने के लिए 695 रुपये से लेकर 730 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 20 शेयर का है। ओर्कला इंडिया के इस आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स कम से कम 1 लॉट यानी 20 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, जिसके लिए उन्हें 14,600 रुपये का निवेश करना होगा। इस आईपीओ के तहत एक रुपये फेस वैल्यू वाले 2,28,43004 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये जारी किए जा रहे हैं।

आईपीओ खुलने से एक कारोबारी दिन पहले 28 अक्टूबर शुक्रवार को ओर्कला इंडिया ने एंकर इनवेस्टर्स से 499.60 करोड़ रुपये जुटाए। इन एंकर इनवेस्टर्स में निप्पॉन लाइफ इंडिया ट्रस्टी लिमिटेड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ ट्रस्टी प्राइवेट लिमिटेड, अशोका व्हाइटओक इंडिया अपॉर्च्युनिटीज फंड, जुपिटर इंडिया फंड, एलआईसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड, रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, बजाज फिनसर्व कंजप्शन फंड जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए 49.93 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इसके अलावा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 34.95 प्रतिशत हिस्सा, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (एनआईआई) के लिए 14.98 प्रतिशत हिस्सा और एंप्लॉयीज के लिए 0.13 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व है। इस इश्यू के लिए आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज लिमिटेड को बुक रनिंग लीड मैनेजर बनाया गया है। केफिन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को रजिस्ट्रार बनाया गया है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो प्रॉस्पेक्टस में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत में उतार चढ़ाव होता रहा है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 339.13 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में घट कर 226.33 करोड़ रुपये और 2024-25 में उछल कर 255.69 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 2,201.44 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 2,387.99 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 2,455.24 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2025 में कंपनी को 78.92 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। इसी तरह इस अवधि में कंपनी को 605.38 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

इस अवधि में कंपनी के कर्ज में गिरावट आई। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी पर 34.99 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में घट कर 3.77 करोड़ रुपये रह गया। इसके अगले वित्त वर्ष यानी 2024-25 के अंत में कंपनी पर कोई कर्ज नहीं था। हालांकि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2025 की बात करें, तो इस दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 2.33 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इस दौरान कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में भी उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 2,227.28 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 2,793.35 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद 2024-25 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस घट कर 2,445.80 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2025 तक ये 2,523.56 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 312.44 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 343.61 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का ईबीआईटीडीए 396.44 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2025 तक ये 111.75 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा।

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