तीन दिवसीय रथयात्रा मेले के अन्तिम दिन श्वेत परिधान में सजे भगवान जगन्नाथ का दर्शन कर श्रद्धालु हुए निहाल

—सुबह से ही मेला में भगवान के अष्टकोणीय रथ का स्पर्श कर श्रद्धालु विग्रह पर तुलसी की माला, प्रसाद व फल अर्पित कर रहे

—भोर में कार से प्रभु जगन्नाथ, सुभद्राजी एवं बलभद्र जी अस्सी जगन्नाथ मंदिर आएंगे

वाराणसी,29 जून (हि.स.)। काशी के लक्खा मेले में शुमार तीन दिवसीय रथयात्रा मेले के अन्तिम दिन रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अलसुबह से ही मेला क्षेत्र में पहुंचती रही। अंतिम दिन श्वेत परिधान में सजे भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व भाई बलभद्र के अष्टकोणीय रथ को स्पर्श कर लोगों ने चराचर जगत के पालनहार से घर परिवार और देश समाज में सर्वमंगल की गुहार लगाई। श्रद्धालु भगवान के काष्ठ विग्रह का दर्शन कर आह्लादित दिखे। इसके पहले सुबह पांच बजे पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय ने भगवान का श्वेत वस्त्र व श्वेत फूलों से भव्य श्रृंगार किया। रथ के गर्भगृह में विग्रहों के पृष्ठ भाग एवं पाटन की गुलाब एवं बेला की कलियों से सजावट की गई। रथ के शिखर एवं छतरी को हरी पत्तियों एवं सफेद फूलों से सजाया गया। प्रात: छह से आठ बजे तक भजन मंडली ने भजन की प्रस्तुतियां दीं। प्रात: नौ बजे प्रभु को छौंका मूंग चना, पेड़ा, गुड़ एवं खांड़सारी नीबू का तुलसी मिश्रित शरबत का भोग अर्पित किया गया। दोपहर में पूड़ी, कटहल की सादी सब्जी, दही, देशी चीनी, सूजी का हलवा, मालपुआ, पंचमेल मिठाई व कटहल का अचार का भोग लगाया जाएगा। मध्याह्न में 12 बजे रथ को खींचकर यूनियन बैंक आफ इंडिया के पास लाया जाएगा। भोग अर्पित करने के बाद पट बंद कर दिया जायगा। अपराह्न तीन से चार बजे के मध्य शृंगार एवं आरती के बाद दर्शन पूजन का क्रम देर रात तक चलेगा। मेला में दर्शन-पूजन के बाद लोग रथयात्रा-महमूरगंज मार्ग पर लगे स्टालों पर जमकर खरीदारी कर रहे है। बच्चे और महिलाए झूले व चरखी का आनंद लेने के साथ चाट व गोलगप्पे का भी लुत्फ उठा रहे है। मेला क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। भेलूपुर एसीपी, थाना प्रभारी भेलूपुर समेत अन्य अधिकारी चक्रमण करते दिखे। मेला क्षेत्र में लगे सीसी टीवी कैमरे के जरिए भी लोगों पर नजर रखी जा रही थी।

—सोमवार तड़के प्रभु कार से जगन्नाथ मंदिर जाएंगे

तीन दिवसीय विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा के समापन के बाद सोमवार तड़के रात तीन बजे प्रभु की आरती होगी। तीन बजे आरती के पश्चात रथ का पट बंद कर दिया जाएगा। भोर में प्रभु को विदाई दी जाएगी। इसके बाद कार से प्रभु जगन्नाथ, सुभद्राजी एवं बलभद्र जी के विग्रहों को अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंचाया जाएगा। सोमवार को प्रात: मंगला आरती के बाद मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा। उधर,रथयात्रा मेला समाप्त होने के बाद भगवान के रथ को खींचकर सिगरा शहीद उद्यान स्थित रथशाला ले जाकर वहां उसे सुरक्षित खड़ा कर दिया जाएगा ।

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By editor

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