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वे यहां ‘विजय दिवस 2025’ समाराेह से पहले संपन्न एक मंत्री स्तरीय सुरक्षा बैठक के बाद संवाददाताओं से वार्ता कर रहे थे। उन्हाेंने कहा कि फैसले के संबंध में कुछ भी ‘अप्रत्याशित’ नहीं हुआ है।

गाैरतलब है कि 17 नवंबर काे हसीना काे मानवता के खिलाफ अपराधाें का दाेषी ठहराते हुए उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई है। उधर, बांग्लादेश में हर साल 16 दिसंबर काे 1971 के मुक्ति संग्राम की याद में विजय दिवस मनाया जाता है।

हसीना के खिलाफ आईसीटी के फैसले के बाद अशांति की खबरों और विजय दिवस से पहले किसी भी संभावित खतरे के बारे में सवालों के जवाब में उन्हाेंने कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है और आने वाले इस ‘राष्ट्रीय’ पर्व समाराेहाें काे लेकर चिंता की कोई बात नहीं है।

उन्होंने कहा कि विजय दिवस के कार्यक्रम समयानुसार ही हाेंगे और इस दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका नहीं है।

इस बीच

पांच यूरोपीय अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने शेख हसीना के खिलाफ आईसीटी के फैसले की निंदा करते हुए बांग्लादेश में जारी राजनीतिक रूप से प्रेरित मुकदमों को रोकने के लिए वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया है।

लंदन स्थित मानवाधिकार और अन्य समूहों के एक गठबंधन ने अंतरिम सरकार के तहत दिए गए इस फैसले पर “गहरी चिंता” व्यक्त करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया है।

गठबंधन ने संयुक्त राष्ट्र , संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयाेग, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच, यूरोपीय बाह्य कार्रवाई सेवा, अमेरिकी विदेश विभाग के लोकतंत्र, मानवाधिकार और श्रम ब्यूरो, अंतर्राष्ट्रीय बार एसोसिएशन, राष्ट्रमंडल सचिवालय और संयुक्त राष्ट्र के कई विशेष दूताें काे पत्र भेजकर इस बाबत विराेध दर्ज कराया है।

बयान पर हस्ताक्षर करने वाले संगठनाें में यूरोपीय बांग्लादेश फोरम (ईयू और यूके)

अर्थ सिविलाइज़ेशन नेटवर्क (वैश्विक)

फ्रीडम एंड जस्टिस अलायंस (वैश्विक)

साउथ एशिया डेमोक्रेटिक फोरम (बेल्जियम)

और वर्किंग ग्रुप बांग्लादेश (जर्मनी) शामिल हैं।

By editor

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