गृह राज्यमंत्री राय शुक्रवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के 21वें स्थापना दिवस के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस वर्ष का विषय ‘सुरक्षित राष्ट्र के लिए जोखिम न्यूनीकरण के लिए प्रौद्योगिकी’ रहा, जिसमें आपदा प्रबंधन, तैयारी और लचीलापन निर्माण में उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर जोर दिया गया।

राय ने कहा कि भारत ने इस एजेंडा को अपनी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन रणनीतियों में शामिल कर कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज देश के पास एक लाख से अधिक प्रशिक्षित आपदा मित्र हैं, जिनमें से 20 प्रतिशत महिलाएं ‘आपदा सखी’ के रूप में कार्य कर रही हैं। इसके अलावा यूथ आपदा मित्र योजना के तहत 2.5 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आपदा प्रबंधन में प्रौद्योगिकी के उपयोग का वैश्विक अग्रणी बन चुका है और सरकार का लक्ष्य आपदाओं में शून्य जनहानि सुनिश्चित करना है। अंतिम व्यक्ति तक समय पर चेतावनी पहुंचना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

स्थापना दिवस पर कई महत्वपूर्ण रिपोर्ट, दिशानिर्देश और ज्ञान उत्पाद जारी किए गए, जिनमें ड्रोन/यूएवी के उपयोग संबंधी एसओपी, राज्यों के आपदा प्राधिकरणों को सशक्त बनाने के लिए दिशा-निर्देश, बिजली गिरने से बचाव पर राष्ट्रीय अभियान की रिपोर्ट और दिल्ली हीट एक्शन प्लान 2025 शामिल हैं। इस अवसर पर एनडीएमए और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन के बीच डिजिटल आपदा तैयारी को मजबूत करने के लिए एक एमओयू भी किया गया।

कार्यक्रम में तकनीकी सत्रों के दौरान विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और विभिन्न हितधारकों ने आपदा प्रबंधन में नवाचार और डिजिटल प्रणालियों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर एनडीएमए के सदस्य एवं विभाग प्रमुख राजेंद्र सिंह, गृह मंत्रालय के अपर सचिव (आपदा प्रबंधन) संजीव कुमार जिंदल, एनडीआरएफ के महानिदेशक पियूष आनंद, एनडीएमए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) सैयद अता हसनैन, कृष्ण एस. वत्स, सचिव मनीष भारद्वाज तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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