लखनऊ के पारा क्षेत्र में एक दुखद घटना सामने आई है जिसमें एक नौवीं कक्षा के छात्र ने अपने पिता की डांट से नाराज होकर आत्महत्या कर ली। 16 वर्षीय सुश्रुत पार्थ, जो सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रहा था, ने शुक्रवार को अपने पिता की डांट के बाद अपने घर की छत पर बने कमरे में जाकर दुपट्टे के सहारे फांसी लगा ली। यह मामले ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है और परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है।

सुश्रुत के पिता, महेंद्र पाल सिंह, उन्नाव में एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। शुक्रवार की दिनचर्या के अनुसार, महेंद्र ने दिन के समय जब अपने बेटे को कॉल किया तो वह टीवी देख रहा था। पिता के डांटने पर सुश्रुत गुस्से में आ गया और बात किए बिना ही घर की दूसरी मंजिल पर चला गया। उसके बाद लंबा समय बीत जाने पर उसकी मां ने उसे देखने का फैसला किया, लेकिन वह कमरे में नहीं मिला। मां ने उसे कई बार आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अंततः, जब वह छत पर बने कमरे में गईं, तो वहां दरवाजा बंद था।

पड़ोसियों की मदद से, सुश्रुत की मां एक पड़ोसी की छत से उस कमरे में गईं। वहां उसने पाया कि सुश्रुत पंखे पर लटका हुआ था। यह दृश्य देखकर उसकी चीख सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए और आनन-फानन में सुश्रुत को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया।

सुश्रुत पार्थ अपने माता-पिता का एकलौता बेटा था और उसका एक छोटी बहन भी है। उसकी अचानक मौत ने परिवार के सभी सदस्यों को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस घटना ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे समुदाय में चिंता और दुख का माहौल बना दिया है। यह दुखद मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे युवा पीढ़ी भावनात्मक दबाव को सहन करने में सक्षम नहीं हो रही है। जब पारिवारिक तनाव और डांट-फटकार का एक स्तर पार होता है, तो उसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

इस घटना ने समाज में इस बात की आवश्यकता को स्पष्ट किया है कि हमें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। माता-पिता और शिक्षकों को समझना चाहिए कि बच्चों के साथ संवाद करना और उन्हें समर्थन प्रदान करना कितनी महत्वपूर्ण बात है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए हमें एक सकारात्मक वातावरण बनाना होगा, जहां बच्चे अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकें और समस्या के समाधान के लिए खुलकर बात कर सकें।

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