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केरल के एर्नाकुलम जिले के सरकारी अस्पताल ने पहली बार सफलतापूर्वक हृदय प्रत्यारोपण किया है। यह घटना न केवल भारत के लिए एक बड़ी चिकित्सकीय उपलब्धि है, बल्कि नेपाल-भारत के भावनात्मक रिश्तों का भी दुर्लभ उदाहरण है।

इस हृदय प्रत्यारोपण के माध्यम से नेपाल के सुर्खेत जिले की निवासी 21 वर्षीय नेपाली युवती दुर्गा कामी को नया जीवन मिला। वह पिछले अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह इलाज के लिए केरल पहुंची थीं।

47 वर्षीय ए. शिवु केरल के ही निवासी थे। बीते नवंबर में एक सड़क दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। कुछ दिनों के इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया। यह क्षण उनके परिवार के लिए गहरे शोक का था लेकिन उसी दुख की घड़ी में उन्होंने एक बड़ा मानवीय निर्णय लिया- शिवु का हृदय दान करने का।

उधर, केरल के ही एक अन्य हिस्से में दुर्गा जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही थीं। अनाथालय में पली-बढ़ी दुर्गा ‘कार्डियक सार्कोइडोसिस’ नामक दुर्लभ और गंभीर हृदय रोग से पीड़ित थीं। उनकी मां और बहन की भी इसी बीमारी से मृत्यु हो चुकी थी और पिता पहले ही गुजर चुके थे। हृदय प्रत्यारोपण ही उनकी आखिरी उम्मीद थी। इलाज के लिए वह पहले लखनऊ और फिर काठमांडू गईं, लेकिन एक मलयाली मित्र की सलाह पर वह अंततः कोच्चि पहुंचीं।

केरल राज्य स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें ‘हार्ट डोनर लिस्ट’ में प्राथमिकता दी। अदालत के आदेश, स्वास्थ्य मंत्रालय की सक्रियता और डॉक्टरों के समर्पण से कुछ ही घंटों में शिवु का दिल दुर्गा को प्रत्यारोपित करने का फैसला संभव हो सका। कोच्चि से करीब 11 किलोमीटर दूर हेलीकॉप्टर के जरिए शिवु का दिल सुरक्षित रूप से एर्नाकुलम जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां अनुभवी चिकित्सक टीम ने सफल ऑपरेशन कर दुर्गा को नया जीवन दिया।

दुर्गा के भाई तिलक ने अस्पताल, डॉक्टरों और केरल सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “दाता परिवार और केरल सरकार का मैं दिल से धन्यवाद करता हूं।” केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने भी सोशल मीडिया पर चिकित्सकों की प्रशंसा की और दावा किया कि भारत में पहली बार किसी जिला अस्पताल स्तर पर हृदय प्रत्यारोपण किया गया है।

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By editor

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