नेपाल फिर एफएटीएफ की ‘ग्रे लिस्ट’ में, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग होगा प्रभावित

काठमांडू, 21 फरवरी (हि.स.)। नेपाल एक बार फिर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ‘ग्रे लिस्ट’ में आ गया है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुई एफएटीएफ की बैठक में नेपाल को अगले दो साल के लिए फिर से ‘ग्रे लिस्ट’ में डालने का फैसला लिया गया है। इस फैसले के साथ ही नेपाल को विभिन्न एजेंसियों से मिलने वाला आर्थिक सहयोग प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।

पेरिस में एफएटीएफ की बैठक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, इंटरपोल और वित्तीय खुफिया इकाइयों के एग्मोंट समूह सहित वैश्विक नेटवर्क और पर्यवेक्षी संगठनों के 200 से अधिक सदस्य शामिल हुए। एफएटीएफ की वेबसाइट पर यह फैसला सार्वजनिक किया गया है। एफएटीएफ के बयान में कहा गया है कि आतंकवादी गतिविधियों में वित्तीय निवेश और मनी लॉन्ड्रिंग के जोखिम को कम करने के लिए लक्षित वित्तीय अनुभाग के लिए सॉफ्टवेयर का विकास न करने और गैर-लाभकारी संगठनों के विनियमन के लिए सॉफ्टवेयर की कमी के कारण नेपाल को ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल किया गया है।

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के आर्थिक सलाहकार डॉ. युवराज खतिवडा ने एफएटीएफ के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि विभिन्न शर्तों का पालन न करने के कारण नेपाल को ‘ग्रे सूची’ में वापस डाल दिया गया है। उन्होंने बताया कि अब फिर नेपाल को विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियाई विकास बैंक आदि से ऋण और वित्तीय सहायता मिलने, अनुदान और सहायता कम होने की संभावना बढ़ गई है।

इससे पहले नेपाल को जनवरी, 2008 से जनवरी, 2014 तक “ग्रे लिस्ट” में डाला गया था। इसके बाद कानूनी और संस्थागत ढांचा बनाकर नेपाल को इस सूची से हटा दिया गया था। नेपाल में विश्व बैंक के प्रतिनिधि ने बताया कि जब तक भ्रष्टाचार और सुशासन में सुधार नहीं होगा, तब तक खतरा है कि नेपाल ‘ग्रे लिस्ट’ में ही बना रहेगा। नेपाल के ‘ग्रे सूची’ में आते ही देश में गरीबी रेखा से नीचे के समुदाय सबसे अधिक प्रभावित होंगे। ‘ग्रे लिस्ट’ में होने के पीछे कारण है कि नेपाल मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी गतिविधियों के वित्तीय सहयोग को लेकर कानून नहीं बना पाया है। इससे संबंधित विधेयक संसद में पिछले चार महीने से लंबित है।

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