इस मौके पर प्रह्लाद पटेल ने प्रधानमंत्री को अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक साधना का प्रतीक; मां नर्मदा परिक्रमा के अनुभवों और अनुभूतियों पर संदर्भित पुस्तक ‘परिक्रमा-कृपा सार’ भेंट की जिसका विमाेचन हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माेहन भागवत ने किया था । पटेल ने इसके साथ ही प्रधानमंत्री काे 108 नदियों के उद्गम स्थलों से संकलित पवित्र जल का संग्रह भी एक विशेष लकड़ी के डिब्बे में भेंट किया। इसके साथ शाम को प्रहलाद पटेल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वयोवृद्ध भाजपा नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी से भी भेंट की।

मीडिया से बातचीत में

मंत्री प्रह्लाद पटेल ने बताया कि यह पुस्तक उनके दो वर्षों के गहन श्रम और साधना का परिणाम है। उन्होंने दो बार नर्मदा परिक्रमा की है। उसी अनुभव, आस्था व तपस्या को इस पुस्तक में समर्पित भाव से संजोया है। यह ग्रंथ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय संस्कृति में नदियों और परिक्रमा की परंपरा का भी जीवंत दस्तावेज है।

उन्होंने बताया कि

प्रधानमंत्री मोदी ने इस आध्यात्मिक प्रयास की सराहना की और उनके समर्पण को प्रेरणास्पद बताया।

उन्होंने कहा कि ‘परिक्रमा कृपा सार’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि मातृ नर्मदा और भारत की जलसंस्कृति के प्रति श्रद्धा का साकार रूप है।

पुस्तक का विमोचन 14 सितंबर, 2025 को ‘हिंदी दिवस’ पर इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने किया था। अब प्रधानमंत्री को इस ग्रंथ का भेंट किया जाना, इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान देता है। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि श्रद्धा, संस्कृति और समर्पण की भावनाओं से ओतप्रोत एक आध्यात्मिक संगम बन गई।

प्रह्लाद सिंह पटेल की दूसरी पुस्तक भी शीघ्र प्रकाशित होगी जाे नर्मदा परिक्रमा से जुड़े अन्य प्रसंगों पर आधारित है।

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