प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) में आयोजित ‘प्रधानमंत्री व्याख्यान श्रृंखला’ के अंतर्गत गुरुवार को मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने “डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन और विरासत” विषय पर व्याख्यान दिया।

अहलूवालिया ने कहा कि डॉ. सिंह का लंबा और विशिष्ट करियर तीन प्रमुख चरणों में बंटा था—1970 से 1991 तक एक अर्थशास्त्री और नौकरशाह के रूप में, 1991 से 1996 तक वित्त मंत्री के रूप में, और 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के रूप में। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के तौर पर डॉ. सिंह का कार्यकाल देश के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ, क्योंकि उसी समय भारत ने व्यापक आर्थिक उदारीकरण की दिशा में कदम बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री रहते हुए डॉ. सिंह ने मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजनाएं लागू कीं और भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौते के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि डॉ. सिंह ने आर्थिक सुधारों की निरंतरता बनाए रखी, जिससे 2004 से 2010 के बीच देश की विकास दर 8 से 9 प्रतिशत तक पहुंची।

कार्यक्रम के दौरान पीएमएमएल के कार्यकारी परिषद अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह अपनी विद्वत्ता, सादगी और समर्पण के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह के नेतृत्व में लागू आर्थिक सुधार आज भी वैश्विक स्तर पर एक मिसाल हैं।

पीएमएमएल के निदेशक अश्विनी लोहानी ने बताया कि प्रधानमंत्री व्याख्यान श्रृंखला का उद्देश्य देश के प्रधानमंत्रियों के योगदान, दृष्टि और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय को लोकतंत्र के मंदिर के रूप में विकसित किया गया है, जहां प्रधानमंत्रियों के जीवन, संविधान, अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान से जुड़ी प्रदर्शनियां और प्रतिदिन दो ‘लाइट एंड साउंड शो’ भी आयोजित किए जाते हैं।

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