राज्यपाल बुधवार को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में राष्ट्रीय सैनिक संस्था की ओर से आयोजित “शहीद सम्मान समारोह” में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल ने बलिदानी सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजनों को सम्मानित किया।

राज्यपाल ने कहा कि यह अवसर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उन अमर सपूतों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का क्षण है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर राष्ट्र की स्वतंत्रता और गौरव की रक्षा की। सैनिक जब सीमा पर खड़ा होता है, तो उसके मन में केवल ‘राष्ट्र प्रथम’ का ही भाव होता है। उसकी प्राथमिकता मातृभूमि की रक्षा होती है, यही भावना राष्ट्र को सुरक्षित रखती है।

राज्यपाल ने कहा कि सैनिक केवल सीमाओं की रक्षा नहीं करते, बल्कि देश की प्रगति और आत्मविश्वास के भी प्रहरी हैं। प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह सैनिकों का सम्मान करे, क्योंकि सैनिकों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म है। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं, जो अनुशासन, नेतृत्व और ईमानदारी के प्रतीक हैं। उन्होंने युवाओं के मार्गदर्शन, समाज सेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और नशा मुक्ति अभियानों में पूर्व सैनिकों की भूमिका की सराहना की।

राज्यपाल ने राष्ट्रीय सैनिक संस्था की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक विचारधारा है जो अनुशासन, साहस और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बीते दशक में भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक स्वतंत्रता नहीं देता, बल्कि यह राष्ट्रीय गौरव की पुनर्स्थापना का प्रतीक है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय सैनिक संस्था के अध्यक्ष कर्नल टी पी त्यागी (रि.) और अन्य पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में संस्था के सदस्य मौजूद थे।

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