महाकुम्भ : अखाड़े 7 फरवरी को छोड़ेंगे संगम की भूमि, काशी में होगा चौथा अमृत स्नान

महाकुम्भ नगर, 03 फरवरी (हि.स.)। तीर्थराज प्रयाग में समंग की पावन रेती पर चल रहे महाकुम्भ का समापन होली के बाद काशी में रंगपंचमी के दिन होली खेलने के बाद होगा। यही नहीं, संगम में तीन अमृत स्नान पूरे करने के बाद प्रमुख अखाड़ों के सन्यासी महादेव की नगरी वाराणसी में महाशिवरात्रि के दिन अमृत स्नान (शाही स्नान) करेंगे। इसके पहले वहां पेश्वाई की रस्म अदा की जायेगी। महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि, 7 फरवरी को अखाड़े कुम्भ क्षेत्र से काशी के लिये रवाना हो जाएंगे।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने ‘हिन्दुस्थान समाचार’ को बताया कि यह अखाड़ों की परम्परा रही है कि वे प्रयाग कुम्भ का समापन काशी में किया करते हैं और महादेव की नगरी में अमृत स्नान भी करते हैं। अमृत स्नान के बाद अखाड़े के सन्यासी भोले बाबा के दरबार में जाकर उनका दर्शन भी करते हैं। फिर होली पर्व के पांचवें दिन रंगपंचमी को अखाड़े के सन्यासी जमकर होली खेलते हैं उसके बाद ही उनका कुम्भ पर्व समाप्त होता है। इस समय अखाड़े अपना हिसाब-किताब भी करते हैं और नई कमेटी को आय-व्यय को ब्यौरा सौंपते हैं।

परम्परा के अनुसार उपरोक्त कार्यक्रमों के बाद अखाड़े का रमता पंच दूसरे कुम्भ के लिए रवाना हो जाता है। जबकि शम्भू पंच के नये पदाधिकारी अखाड़े की व्यवस्था में पुनः लग जाते हैं। गौरतलब है कि प्रयाग कुम्भ के बाद वर्ष 2027 में नासिक में कुम्भ मेला लगेगा।

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