कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पा त्रिवेदी के भजन “करुणा निधान रउवा जगत के दाता” से हुई। इसके बाद “मेरी विनती सुनो सांवरे राम जी” की प्रस्तुति ने उपस्थित भक्तों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। लोकगीत “तोहार दूल्हा गौरा सबसे निराला” की प्रस्तुति ने पांडाल में तालियों की गड़गड़ाहट भर दी। तेजस्वी त्रिवेदी की प्रस्तुत शिवगीत “लाईके शिव के मनाई हो” को भी दर्शकों ने खूब सराहा। आशा त्रिवेदी ने महादेवा लोधेश्वर धाम पर आधारित गीत “चलो चली भइय्या महादेवा लोधेश्वर की शिवनगरी” प्रस्तुत कर भक्तिमय माहौल को चरम पर पहुंचा दिया।
प्रथम दिन हुए कई कार्यक्रम
पंडित अनुज मिश्रा एंड ग्रुप की प्रस्तुति ने महादेवा महोत्सव के सांस्कृतिक पंडाल में भक्ति और कला का अद्भुत संगम रचा। कलाकारों ने कथक नृत्य शैली के माध्यम से महादेव की दिव्य लीलाओं को ऐसा जीवंत किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध होकर देखते रह गए।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘कर्पूर गौरं करुणावतारं’ पर सधी हुई भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध पगचाप के साथ हुई, जिसने मंच पर आनंद तांडव की अद्वितीय छटा बिखेरी। इसके बाद ‘जटा तट वी गलज्ज्वलज्जलप्रवाह’ पर रौद्र तांडव की जोशीली प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को भक्ति भाव में डुबा दिया। करीब पांच हजार वर्ष पुरानी शिव ध्रुपद की मनोहारी प्रस्तुति ने दर्शकों को प्राचीन भारतीय संगीत की अनुगूंज का अद्भुत अनुभव कराया। कार्यक्रम में शक्ति वंदना ‘जय जय गिरिराज किशोरी’, शिव–गंगा और शिव नाटिका नृत्य की प्रभावी प्रस्तुतियां भी हुईं, जिनसे पूरे पंडाल में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया।————-
