सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने बिहार में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध शुरू कर दिया। शोरगुल के बीच प्रश्नकाल बाधित हो गया और केवल एक ही प्रश्न पर चर्चा हो सकी। समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्य रुचि वीरा ने सरकारी कंपनियों में रोजगार से जुड़ा प्रश्न पूछा, जिसका उत्तर श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने दिया।

हंगामें के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से बार-बार सदन की मर्यादा बनाए रखने और प्रश्नकाल को निर्विघ्न चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल महत्वपूर्ण होता है जिसमें सदस्य सरकार से जवाब मांगते हैं। यह कार्यवाही जनता की अपेक्षाओं से जुड़ी होती है। बिरला ने कहा कि तख्तियों और नारों से सदन नहीं चल सकता। उन्होंने विपक्ष को चेताया कि सदन को योजनाबद्ध तरीके से बाधित करना संसदीय परंपराओं के अनुकूल नहीं है। अध्यक्ष ने कहा, “मैं हर दिन कोशिश करता हूं कि सभी को अवसर मिले, लेकिन यह परंपरा उचित नहीं है कि रोज नारेबाजी और तख्तियों के ज़रिए कार्यवाही में व्यवधान डाला जाए।”

उन्होंने कहा कि यदि सदस्यों को किसी मुद्दे पर चर्चा करनी है, तो वे प्रश्नकाल के बाद उनसे मिल सकते हैं, उन्हें नियमानुसार चर्चा का अवसर दिया जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष ने विरोध कर रहे सदस्यों को याद दिलाया कि वे लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देश की जनता देख रही है कि आप नियोजित रूप से सदन को बाधित कर रहे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संसदीय गरिमा के लिए ठीक नहीं है।

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