द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार, एआरवाई न्यूज चैनल और जियो चैनल की खबर के अनुसार, पुलिस ने सोमवार को बताया कि स्वयंसेवक और मजदूर रास्ते की मरम्मत कर रहे थे। तभी पहाड़ी से हुए भूस्खलन के मलबे में यह लोग दब गए। अस्पताल के सूत्रों ने पुष्टि की है कि सभी मृतक स्थानीय स्वयंसेवक हैं। बचाव अधिकारियों ने बताया कि मलबे में दबे लोगों की तलाश की जा रही है।

सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से कई नदियों में जल प्रवाह बढ़ गया है। शीशपर ग्लेशियर में आए पानी के सैलाब से कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है और हुंजा की ओर जाने वाले काराकोरम राजमार्ग का एक हिस्सा बंद हो गया। यातायात को नगर रोड से डायवर्ट किया जा रहा है। इससे पाकिस्तान और चीन के बीच जमीनी संपर्क टूट गया। इस बीच अधिकारियों ने क्षेत्र में और बारिश और भूस्खलन की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री हाजी गुलबर खान ने राजमार्ग को तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया है।

इससे पहले अधिकारियों ने डेरा गाजी खान, उत्तर-पूर्वी और ऊपरी पंजाब, इस्लामाबाद-रावलपिंडी, उत्तर-पूर्वी बलूचिस्तान, चित्राल, स्वात, शांगला, मनसेहरा, मुर्री, गलियत, कोहिस्तान, एबटाबाद, बुनेर, स्वाबी, नौशेरा और मर्दन में स्थानीय नदियों और नालों में बाढ़ आने की चेतावनी दी थी। खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।

पुलिस ने पुष्टि की है कि बचाव अभियान के दौरान मलबे से चार लोगों को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया है। पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गिलगित-बाल्तिस्तान में हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों को मुआवजे के चेक वितरित करते हुए चार अरब रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी।

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