जिले के हरिपुर बनवा स्थित डॉ. अशोक मिश्रा के निवास पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन अयोध्या धाम से पधारे कथा व्यास आचार्य आलोक शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म का वर्णन किया। कथा का शुभारंभ उन्होंने “पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे” भजन के साथ किया।
आचार्य शास्त्री ने प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि भक्त प्रह्लाद के जीवन में कई संकट आए, लेकिन उनकी भक्ति अटूट रही। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मनुष्य को भी जीवन की कठिनाइयों में भगवान को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने समुद्र मंथन की कथा को केवल देवासुर संग्राम न बताकर, इसे जीवन का संघर्ष बताया, जिसमें विष और अमृत दोनों प्राप्त होते हैं। इस अवसर पर भाजपा के पूर्व विधायक देवमणि द्विवेदी, परमहंस टीकरमाफ़ी आश्रम के प्रधानाचार्य डॉ. धर्मेंद्र शास्त्री, इसौली के पूर्व विधायक चंद्र भद्र सिंह सोनू, जटा शंकर पांडेय, मनोज बरनवाल, अरविंद दुबे, डॉ. अशोक गुप्ता और डॉ. मीना सिंह सहित सैकड़ों भक्त उपस्थित रहे। सभी भक्तों ने व्यास पीठ की आरती की और प्रसाद ग्रहण किया।
