अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को साेशन मीडिया एक्स पर कहा कि यदि देश की सर्वोच्च पीठ में विराजमान न्यायमूर्ति पर इस प्रकार का आक्रमण करने वाले को दंड नहीं दिया गया, तो अन्य न्यायाधीशों की सुरक्षा का क्या होगा। यह न्यायपालिका के लिए एक गंभीर संकेत है।

उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति गवई ने इस घटना के उपरांत कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का जो निर्णय लिया, वह उनकी उदारता को दर्शाता है, परन्तु ऐसी घटनाओं को केवल सहिष्णुता के रूप में देखना उचित नहीं है।

केजरीवाल ने कहा कि जो लोग सोशल मीडिया पर न्यायमूर्ति गवई का मजाक उड़ा रहे हैं अथवा उन्हें धमकाने का प्रयास कर रहे हैं, उनका उद्देश्य सम्पूर्ण न्याय व्यवस्था को भयभीत करना है। ऐसे सभी व्यक्तियों के विरुद्ध विधि के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जूता फेंकने का प्रयास करने वाले व्यक्ति और न्यायपालिका के विरुद्ध सोशल मीडिया पर अपमानजनक कथन करने वालों को ऐसा दंड दिया जाना चाहिए जिससे कोई भी भविष्य में न्यायालय से छेड़छाड़ की हिम्मत न करे। यह न्याय के मंदिर की रक्षा का विषय है।

उल्लेखनीय है कि, 6 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय की प्रथम पीठ में एक याचिका पर सुनवाई के समय 71 वर्ष के अधिवक्ता राकेश किशोर ने न्यायमूर्ति बीआर गवई की ओर जूता फेंकने का प्रयास किया। यह याचिका खजुराहो मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा की पुनर्स्थापना से संबंधित थी। बताया जाता है कि न्यायालय की कुछ टिप्पणियों से असंतुष्ट होकर अधिवक्ता ने यह कृत्य किया, जिसे कुछ लोगों ने सनातन धर्म का अपमान बताया है।

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