शिविर के प्रथम दिन गायत्री विद्यापीठ की व्यवस्था मण्डल की प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने कहा कि जब इंसान अपनी सोच को घर तक सीमित रखता है, तब समस्याएँ भी सीमित रहती हैं और जब वह समाज के प्रति जागरूक होता है, तभी उसकी सोच व्यापक बनती है। उन्होंने कहा कि साठ के दशक में ही आचार्य पं. श्रीराम शर्मा तथा माता भगवती देवी शर्मा ने नारी जागरण आंदोलन की शुरुआत की, तब से नारियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में कार्य किया जा रहा है।
शांतिकुंज महिला मण्डल की प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने कहा कि आज आवश्यक हो गया है कि हर नारी अपनी संस्कृति और पहचान को बनाए रखें तथा आने वाली पीढ़ी को भी संस्कारवान बनाएं। इससे पूर्व शिविर के प्रथम दिन शांतिकुंज के विषय विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
