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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को तमिलनाडु के सांसदों के साथ एक अहम बैठक की। जे पी नड्डा ने सांसदों से भारत को टीबी मुक्त देश बनाने के अभियान में भागीदारी करने आह्वान किया। जे पी नड्डा ने कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी को खत्म करने के लिए जल्दी पहचान, समय पर इलाज और लोगों की भागीदारी (जन भागीदारी) बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैलाकर, जांच को बढ़ावा देकर और मरीजों को सहयोग देकर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल भी मौजूद रहीं।

बैठक के दौरान जे पी नड्डा ने सांसदों को बताया कि भारत ने टीबी के खिलाफ लड़ाई में बड़ी प्रगति की है। 2015 से 2024 के बीच टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत की कमी आई है

। टीबी से होने वाली मौतों में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट हुई है

। 92 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों को इलाज मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, नई तकनीक, बेहतर जांच और लोगों की भागीदारी की वजह से मिली है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि देशभर में एआई से चलने वाली मोबाइल एक्स-रे मशीनें लगाई जा रही हैं

। 9,300 से ज्यादा आधुनिक जांच मशीनें हर ब्लॉक तक पहुंच चुकी हैं। दवा-प्रतिरोधी टीबी का इलाज अब 6 महीने में पूरा हो रहा है, जो पहले 9–12 महीने लगता था। टीबी मरीजों को पोषण देने के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत हर महीने की मदद 500 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये कर दी गई है। अब तक 1.3 करोड़ से ज्यादा मरीजों को 4,400 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है।

तमिलनाडु में स्थिति

पर जे पी नड्डा ने तमिलनाडु के प्रयासों की सराहना की, लेकिन शहरी झुग्गियों, आदिवासी इलाकों, प्रवासी मजदूरों और असंगठित कामगारों में चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ज्यादा टीबी मामलों का सामने आना यह दिखाता है कि जांच बेहतर हो रही है, जो अच्छी बात है।

स्वास्थ्य मंत्री ने तमिलनाडु के सांसदों से अपील की कि वे इस मुहिम में भागीदार बने और देश को टीबी मक्त बनाए।

By editor

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