आम आदमी पार्टी के दस विधायकों ने दिया समर्थन

दिल्ली | पंजाब की राजनीति में सोमवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला, जब जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवनीत चतुर्वेदी ने पंजाब विधानसभा स्थित सचिवालय के दफ्तर में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। रिटर्निंग अधिकारी ने उनका नामांकन स्वीकार कर लिया। इस दौरान आम आदमी पार्टी के दस विधायक भी मौजूद रहे, जिन्होंने नवनीत चतुर्वेदी को खुला समर्थन दिया और फॉर्म 2C के साथ उनके पक्ष में नामांकन पत्र सौंपा।

इस कदम से पंजाब की राजनीति में हलचल मच गई है और यह संकेत स्पष्ट हो गया है कि आम आदमी पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवार राजिंदर गुप्ता की जीत अब उतनी आसान नहीं रही।दरअसल, आम आदमी पार्टी ने हाल ही में पंजाब से राज्यसभा उपचुनाव के लिए उद्योगपति राजिंदर गुप्ता को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। गुप्ता, ट्राइडेंट ग्रुप के चेयरमैन हैं और उन्हें मुख्यमंत्री भगवंत मान का करीबी माना जाता है। पार्टी के पास 117 सदस्यीय विधानसभा में 93 विधायक हैं, जिससे पहले माना जा रहा था कि यह सीट निर्विरोध जीत ली जाएगी। लेकिन नवनीत चतुर्वेदी के निर्दलीय रूप से मैदान में उतरने और दस AAP विधायकों के समर्थन से समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह विकास न केवल पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल उठाता है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों की दिशा भी तय कर सकता है।

सूत्रों के अनुसार, नवनीत चतुर्वेदी को समर्थन देने वाले विधायक पार्टी लाइन से हटकर इस चुनाव में स्वतंत्र रुख अपनाने का संकेत दे रहे हैं। यह स्पष्ट करता है कि आप के भीतर असंतोष और मतभेद की स्थिति मौजूद है। वहीं, चतुर्वेदी के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने यह फैसला राजनीतिक शुचिता और जनप्रतिनिधित्व की स्वायत्तता के आधार पर लिया है।इस घटनाक्रम ने न केवल पंजाब में आम आदमी पार्टी की स्थिति को चुनौती दी है, बल्कि दिल्ली तक राजनीतिक हलचल मचा दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समर्थन आगे भी बरकरार रहा तो नवनीत चतुर्वेदी पंजाब की राजनीति में एक नए शक्ति केंद्र के रूप में उभर सकते हैं।

इस बीच नवनीत चतुर्वेदी ने घोषणा की है कि वह मंगलवार सुबह 11 बजे चंडीगढ़ प्रेस क्लब में मीडिया से रूबरू होंगे और इस पूरे घटनाक्रम पर अपना आधिकारिक बयान जारी करेंगे।उधर, आम आदमी पार्टी के सूत्रों ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अंदरखाने में मंथन तेज बताया जा रहा है। यह देखा जाना बाकी है कि पार्टी इस संभावित विद्रोह से निपटने के लिए क्या कदम उठाती है। कुल मिलाकर पंजाब की राज्यसभा सीट अब एक दिलचस्प मुकाबले में बदल चुकी है, जिसमें निर्दलीय नवनीत चतुर्वेदी की एंट्री ने पूरे समीकरण को नया मोड़ दे दिया है।

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