जमाअत-ए-इस्लामी ने मुस्लिम विरोधी हिंसा और बुलडोजर अन्याय पर चिंता जताई

नई दिल्ली, 03 जून (हि.स.)। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने फिलिस्तीन के गाजा में जारी नरसंहार की कड़ी निंदा की है। जमाअत के नेताओं न इसके साथ ही देश भर में मुस्लिम विरोधी हिंसा में वृद्धि और मुस्लिम संपत्तियों, संस्थानों को निशाना बनाने के लिए बुलडोजर एक्शन पर भी चिंता जताई है।

जामिया नगर के अबुल फजल स्थित अपने मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने गाजा में नए इजरायली हमले और फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ जारी नरसंहार की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जमाअत फिलीस्तीनी जनता के साथ एकजुटता से खड़ी है तथा तत्काल और बिना शर्त युद्ध विराम, नाकाबंदी हटाने तथा फिलीस्तीनी अधिकारों की पूर्ण बहाली की मांग करती है। उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि मात्र चिंता व्यक्त करने से आगे बढ़कर एक सैद्धांतिक रुख अपनाकर इसरायल के नरसंहार के विरुद्ध निर्णायक अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई की मांग करे।

देश की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने कहा कि अलीगढ़ में चार मुस्लिम मांस व्यापारियों पर हाल ही में हुआ हमला अत्यंत चिंताजनक है।

मोतसिम खान ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में मुस्लिम घरों और मदरसों को ध्वस्त करने के लिए बुलडोजर के दुरुपयोग पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बहराइच और श्रावस्ती जैसे जिलों में जमाअत प्रतिनिधिमंडल के हाल ही में किए गए फैक्ट-फाइंडिंग दौरे से पता चला है कि वैध पंजीकृत और अनुमोदित कई मदरसों को बिना किसी उचित प्रक्रिया के सील कर दिया गया या ध्वस्त कर दिया गया है, जो मुस्लिम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

यह संवैधानिक मानदंडों का स्पष्ट उल्लंघन है और हमारे लोकतांत्रिक ताने-बाने के लिए गंभीर खतरा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उपाध्यक्ष प्रो. सलीम ने देश के पूर्वोत्तर राज्यों में आई विनाशकारी बाढ़ और उसमें 30 से अधिक लोगों की मौत पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि जमाअत-ए-इस्लामी हिंद इस प्राकृतिक आपदा में पीड़ितों के साथ है। उन्होंने बताया कि जमाअत-ए-इस्लामी हिंद की राज्य स्तरीय इकाई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए काम कर रही है।

हिन्दुस्थान समाचार/मोहम्मद ओवैस

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