भारत अब Apple की ग्लोबल सप्लाई चेन का एक मजबूत हिस्सा बन चुका है। इससे देश की अर्थव्यवस्था को तो बढ़ावा मिला ही है, साथ ही लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। भारत को Apple ने अपने मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में तेजी से विकसित किया है, और इसमें फॉक्सकॉन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और पेगाट्रॉन जैसी वैश्विक कंपनियों की अहम भूमिका रही है।

तमिलनाडु बना iPhone निर्माण का सबसे बड़ा केंद्र
तमिलनाडु के श्रीपेरुंबुदुर में फॉक्सकॉन का बड़ा प्लांट स्थित है, जो भारत में iPhone निर्माण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इस प्लांट में iPhone 16 और iPhone 17 जैसे कई मॉडल असेंबल किए जा रहे हैं। यहीं पर पेगाट्रॉन की यूनिट भी है, जिसमें हाल ही में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने 60% हिस्सेदारी हासिल की है। तमिलनाडु वर्तमान में iPhone प्रोडक्शन का सबसे बड़ा हब है और भारत से होने वाले iPhone निर्यात में करीब 70% का योगदान देता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के iPhones का निर्यात किया गया है, जो देश के कुल स्मार्टफोन निर्यात में एक बड़ी हिस्सेदारी रखता है।

कर्नाटक और तेलंगाना में भी बड़े निवेश
तमिलनाडु के बाद, कर्नाटक भी तेजी से इस रेस में आगे बढ़ रहा है। देवनहल्ली में फॉक्सकॉन ने 25,000 करोड़ रुपये के निवेश से एक नया अत्याधुनिक प्लांट स्थापित किया है, जहां iPhone 17 का निर्माण हो रहा है। यह यूनिट चीन के बाहर फॉक्सकॉन की दूसरी सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट मानी जा रही है। कर्नाटक का लक्ष्य 2025 तक 3 करोड़ iPhones का उत्पादन करना है।

वहीं, तेलंगाना के हैदराबाद में फॉक्सकॉन ने हाल ही में एक नया प्लांट शुरू किया है, जहां AirPods का निर्माण किया जा रहा है। भविष्य में यहां iPhone निर्माण की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।

सबसे ज्यादा प्रोडक्शन कहां? 
भारत में 2024-25 के दौरान करीब 22 अरब डॉलर (लगभग 1.89 लाख करोड़ रुपये) के iPhones बनाए गए। इस आंकड़े का सबसे बड़ा हिस्सा तमिलनाडु से आया। Apple के CEO टिम कुक ने भी जून 2025 में एक बयान में कहा था कि अमेरिका में बिकने वाले अधिकतर iPhones भारत में बने हैं।

भारत क्यों बन रहा है ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब?
भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और PLI स्कीम (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) ने Apple जैसी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित किया है। वहीं, चीन में बढ़ती उत्पादन लागत, कड़े नियामक कानून और अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक तनाव ने भारत को एक विश्वसनीय और सस्ता मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन बना दिया है। 2025 की पहली छमाही में भारत में 2.39 करोड़ iPhones बनाए गए, जो कि पिछले साल की तुलना में 53% अधिक है। यह रफ्तार यह दिखाती है कि आने वाले वर्षों में भारत Apple का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग बेस बन सकता है।

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