पौड़ी गढ़वाल, 19 मार्च । हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की अंतर-महाविद्यालयी शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं शुरू हो गई है। गुरुवार को बतौर मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत और अति विशिष्ट अतिथि अमित कुमार मैखण्डी, कालीमठ मंदिर के पुजारी ऋषि राम भट्ट ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। प्रतियोगिता में बिड़ला, टिहरी, पौड़ी परिसर समेत डीएवी, डीबीएस, डॉल्फिन सहित 8 टीमें प्रतिभाग कर रही हैं। उदघाटन अवसर पर टीमों ने श्रीनगर शहर से होते हुए बिड़ला परिसर तो सांस्कृतिक झांकी निकाली।
विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों एवं संस्थानों के बीच सुगम संगीत, वादविवाद, काव्यपाठ, शास्त्रीय गायन, समेत विभिन्न साहित्यिक एवं चित्रकला की प्रतिस्पर्धाएँ आयोजित हुई।
मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत ने सभी छात्र छात्राओं को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी और संस्कृति के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम संयोजक प्रो अतुल ध्यानी ने सभी टीमों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा सबके सम्मुख रखी। वहीं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओपी गुसांई ने कहा कि हमारा प्रयास भविष्य में यही रहेगा कि ये प्रतियोगिताएं समय पर हों ताकि विश्वविद्यालय की टीम जोनल और राष्ट्रीय स्तर पर भाग ले सकें।
इस अवसर पर संकायाध्यक्ष शैक्षणिक प्रो मोहन पंवार ने इन कार्यक्रमों की स्मृतियों को याद करते हुए स्वर्गीय कैप्टन विजयपाल सिंह नेगी को याद किया और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दी। अध्यक्षीय भाषण देते हुए प्रो. एनएस पंवार ने अभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तिव में निखार लाते हैं और कई प्रतिभाएं इन कार्यक्रमों से उभरती है।
इस अवसर पर कुलपति के प्रतिनिधि के रूप में प्रो. एनएस पंवार, प्रो. एमएस पंवार, अधिष्ठाता छात्र कल्याण ओपी गुसाईं, कार्यक्रम संयोजक प्रो. अतुल ध्यानी, प्रो. अरुण रावत, प्रो. एमएस नेगी आदि शामिल रहे।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर हुआ वाद-विवाद, प्रतिभागियों ने रखे सशक्त तर्क
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर-महाविद्यालयी शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में कुल 7 टीमों के 14 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग कर पक्ष एवं विपक्ष में प्रभावशाली तर्क प्रस्तुत किए।
प्रतिभागियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सामाजिक, शैक्षणिक, तकनीकी एवं नैतिक पक्षों पर गंभीर विचार रखते हुए इसके लाभ एवं संभावित चुनौतियों को विस्तार से प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने जहाँ एक ओर एआई के बढ़ते उपयोग को विकास का माध्यम बताया, वहीं दूसरी ओर इसके दुष्प्रभावों पर भी चिंतन व्यक्त किया। प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता अनिल चंदोला, प्रेम पंचोली व शिक्षाविद् सरिता उनियाल उपस्थित रहीं।
