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उन्होंने बौद्धिक संपदा और बौद्धिक संपदा अधिकार का अंतर स्पष्ट करते हुए ट्रेडमार्क, डिजाइन, कॉपीराइट, पेटेंट, ज्योग्राफिकल इंडिकेशन और ट्रेड सीक्रेट के उदाहरणों सहित उनकी उपयोगिता बताई। प्रो. तिवारी ने पेटेंट योग्य वस्तुएँ, पेटेंट प्रक्रिया और संबंधित कार्यालयों की जानकारी भी दी। अपने संबोधन में उन्होंने उत्तराखंड के 18 उत्पादों-जैसे चौलाई, बेरीनाग की चाय, झंगोरा, बुरांस शरबत, मंडुआ, रामनगर की लीची, लाल चावल, रामगढ़ के आड़ू, अल्मोड़ा की लाखोरी मिर्च, माल्टा, तेजपात, ऐपण कला, सफेदराजमा, रिंगाल के क्राफ्ट, थुलमा, भोटिया डैन, च्यूड़ा के तेल और तांबे के उत्पादों को एक ही दिन में प्राप्त हुए जीआई टैग को राज्य की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि आईपीआर छात्रों, शोधकर्ताओं व उद्यमियों के लिए शोध, नवाचार और व्यावसायिक विकास का मजबूत माध्यम है। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ.जयचंद कुमार गौतम, समन्वयक डॉ.उमा पांडे पड़लिया, डॉ.विजय कुमार, डॉ.कैलाश टम्टा, डॉ.संतोष कुमार, डॉ.निर्मल कौर, डॉ.सीता, डॉ.नीतू खुल्बे सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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