नई दिल्‍ली 31 जुलाई । केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को कहा कि अतिरिक्त टैरिफ (शुल्क) लगाए जाने के बाद भी अमेरिका में भारतीय दूरसंचार उपकरणों का निर्यात प्रतिस्पर्धी बना रहेगा। उन्‍होंने प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ के दूरसंचार उपकरणों के निर्यात पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर कहा, “हम प्रतिस्पर्धी बने रहेंगे।”

केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सिंधिया ने भारत में पहली सेलुलर कॉल की 30वीं वर्षगांठ पर नई दिल्‍ली स्थित होटल ले मेरिडियन में कारोबारी संगठन कन्‍फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट), ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (एआईएमआरए और ऑर्गेनाइज्ड रिटेल एसोसिएशन (ओरा) के द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने संबोधन में कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में डिजिटल क्रांति आ गई है। उन्‍होंने कहा क‍ि डिजिटल क्रांति के चलते यूपीआई के जरिए 2.5 बिलियन लेन-देन प्रतिवर्ष हो रहे हैं। हम 4जी उपकरण खुद बनाने वाले 5वें देश बन गए हैं, अब 6जी में भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा।

उन्‍होंने कहा क‍ि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से 6.5 लाख गांवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने के लिए 17 बिलियन डॉलर का निवेश होगा। उन्‍होंने कहा कि डिजिटल हाईवे अब हमारी नसों की तरह देशभर में दौड़ रहा है। मैं आश्वस्त करता हूं कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और बेहतर टेलीकॉम सेवाएं मिलेंगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत टेलीकॉम सेक्टर में दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनेगा।”

इस अवसर पर चांदनी चौक से भाजपा सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके नेतृत्व में दूरसंचार क्षेत्र का उदारीकरण हुआ और मोबाइल फोन आम जनता के लिए सहज सुलभ हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी सराहना की, जिनके डिजिटल इंडिया मिशन ने न केवल मोबाइल की पहुंच को गहरा किया, बल्कि मोबाइल को सशक्तिकरण, सुशासन, उद्यमिता और सामाजिक न्याय का साधन बना दिया।

खंडेलवाल ने कहा, “वॉइस से वैल्यू तक भारत की मोबाइल यात्रा वैश्विक स्तर पर एक केस स्टडी है। उन्‍होंने अपने संबोधन में कहा क‍ि जो यात्रा 1995 में एक फोन कॉल से शुरू हुई थी, वही आज ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति दे रही है।” ये अवसर विशेष रूप से इसलिए बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह भारत की पहली मोबाइल कॉल की 30वीं वर्षगांठ थी, जब 31 जुलाई 1995 को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सुख राम से बात की थी, जिससे देश मोबाइल युग में प्रवेश कर गया था।

इससे पहले केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत में पहली सेलुलर कॉल की 30वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक अनूठी और यादगार प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जिसमें तीन दशकों के 300 से ज्‍यादा मोबाइल हैंडसेट प्रदर्शित किए गए। प्रदर्शनी में भारत के शुरुआती भारी-भरकम उपकरणों से लेकर एआई और 5जी संचालित आधुनिक स्मार्टफोन्स तक प्रदर्शित किया गया। यह प्रदर्शनी व्यक्तिगत संपर्क के विकास और इसके व्यापार, संचार और संस्कृति पर प्रभाव की एक रोचक झलक पेश करती है।

उल्‍लेखनीय है कि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत अबतक करीब 85,000 करोड़ रुपये के दूरसंचार उपकरणों का निर्माण हुआ है, जिनमें से 16,000 करोड़ रुपये के उपकरण विभिन्न देशों को निर्यात किए गए हैं।

By editor

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