भारत ने एक बार फिर कहा, संघर्ष विराम में व्यापार मुद्दा नहीं रहा

नई दिल्ली, 29 मई (हि.स.)। भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि पाकिस्तान के साथ ऑपरेशन सिंदूर के बाद संघर्ष विराम पड़ोसी देश की ओर से आए अनुरोध के कारण ही हुआ था और इसमें तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। साथ ही इस दौरान कई देशों के नेताओं से बातचीत हुई थी लेकिन उसमें कहीं भी व्यापार के बारे में कोई बातचीत नहीं हुई।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में एक प्रश्न के उत्तर में यह बात कही। प्रश्न में एक अमेरिका अदालत में वहां की सरकार की ओर से टैरिफ नीति को सही ठहराने के लिए भारत-पाक संघर्ष विराम का उदाहरण दिया गया था। इसी पर प्रवक्ता ने आज एक बार फिर स्पष्टीकरण दिया है।

प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच फायरिंग बंद करने का निर्णय दोनों देशों के डीजीएमओ के सीधे संपर्क से लिया गया था और इस वार्ता में व्यापार या शुल्क से संबंधित कोई मुद्दा नहीं उठा।

इस दौरान प्रवक्ता ने बताया कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार वार्ताएं फिलहाल जारी हैं और हाल ही में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका यात्रा हुई है। उन्होंने कहा कि बातचीत पूरी होने के बाद ही कोई ठोस जानकारी साझा की जा सकेगी।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री की अमेरिका यात्रा (27 से 29 मई) के बारे में जानकारी देते हुए जायसवाल ने बताया कि उन्होंने व्हाइट हाउस में उच्च स्तरीय बैठकें कीं। इन बैठकों में क्रिटिकल मिनरल्स और उभरती प्रौद्योगिकियों पर द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

विदेश मंत्रालय ने अमेरिका द्वारा छात्र और एक्सचेंज वीज़ा को लेकर जारी नई गाइडलाइन्स पर भी प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय छात्रों की भलाई सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और भारत यह उम्मीद करता है कि छात्रों के आवेदन योग्यता के आधार पर स्वीकार किए जाएंगे।

इसके अलावा उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 से अब तक 1,080 भारतीय नागरिक अमेरिका से लौट चुके हैं या निर्वासित किए गए हैं, जिनमें से लगभग 62 प्रतिशत वाणिज्यिक उड़ानों के ज़रिये लौटे हैं।

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