जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बिना लाइसेंस शस्त्र रखना अपराध है। आयुध (संशोधन) अधिनियम-2019 के अनुसार इसकी सजा दो वर्ष से पाँच वर्ष के कारावास तक हो सकती है, साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है। उन्होंने शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रियाओं का कड़ाई से अनुपालन कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने बताया कि बैठक में जानकारी दी गई कि जनपद में 39,473 व्यक्तिगत शस्त्र लाइसेंस धारक और 71 शस्त्र विक्रय स्थल हैं। कानपुर नगर वैधानिक शस्त्र विक्रय का प्रदेश का प्रमुख केंद्र है। जिलाधिकारी ने बंदूक और कारतूस निर्माण व विक्रय केन्द्रों पर नियमित निगरानी रखने और समय-समय पर जांच करने के आदेश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि शस्त्रों के वरासत से जुड़े प्रकरणों में यह सुनिश्चित किया जाए कि आवेदक जनपद का ही निवासी हो और आवेदन पत्र पर दर्शाए गए पते पर ही निवास करता हो। साथ ही पिछले पाँच वर्षों में आवेदक ने किन-किन स्थानों पर निवास किया है, इसकी भी पुष्टि की जाए। जिन खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स शस्त्र लाइसेंस दिया गया है, उनमें से कितने खिलाड़ी वास्तव में अभ्यास कर रहे हैं या प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं, इसका विस्तृत ब्यौरा तैयार किया जाए। एलआईयू को संवेदनशील इलाकों से इंटेलिजेंस इनपुट जुटाने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि आयुध (संशोधन) अधिनियम, 2019 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के पास दो से अधिक शस्त्र हैं, तो उसे एक वर्ष के भीतर अतिरिक्त शस्त्र जमा करना होगा। निर्धारित अवधि में ऐसा न करने पर संबंधित शस्त्र का लाइसेंस 90 दिनों के भीतर निरस्त कर दिया जाएगा। यह नियम वरासत मामलों पर भी लागू होगा।

उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के अनुसार शस्त्रों के गैर-लाइसेंसी निर्माण, बिक्री, खरीद या परिवहन जैसे अपराधों पर अब सजा और कठोर की गई है। ऐसे मामलों में न्यूनतम सात वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माना हो सकता है। निषिद्ध हथियारों से जुड़े अपराधों में न्यूनतम दस वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा होगी। इसी तरह अवैध आयात-निर्यात, तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में भी यही प्रावधान लागू होंगे।

बैठक में एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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