राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर और वीरता पर आधारित कहानियों को लेकर आने वाले समय में कई भव्य फिल्में बनने की उम्मीद है। फिल्म अभिनेता और कास्टिंग डायरेक्टर अभिषेक बनर्जी का मानना है कि ‘छावा’ जैसी फिल्मों की सफलता के बाद, राजस्थान के वीरों की कहानियों पर भी दर्शक दिलचस्पी रखेंगे। वे जयपुर में आईफा 2025 पुरस्कार समारोह के दौरान भास्कर से बातचीत कर रहे थे। अभिषेक ने कहा कि राजस्थान की मिट्टी में न केवल ऐतिहासिक कहानियाँ बसी हुई हैं, बल्कि वहां सिनेमा के लिए भी अनगिनत प्रेरणाएँ मौजूद हैं। इन कहानियों को सही तरीके से प्रस्तुत करना आवश्यक है ताकि दुनिया भर के दर्शक उन्हें जान सकें।

जयपुर में पहली बार आईफा का समारोह आयोजित होना अभिषेक के लिए एक विशेष अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि वह पहले दुबई में आईफा रॉक्स का होस्ट भी रह चुके हैं, लेकिन जयपुर में होस्ट करना उनके लिए एक मनोरंजक और उमंग से भरा अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि दर्शकों की रुचि बनाए रखने के लिए वह स्क्रिप्ट के मुकाबले ऑडियंस के साथ संवाद स्थापित करने पर जोर देते हैं। राजस्थान की खूबसूरत संस्कृति, खानपान और लोगों की गर्मजोशी ने उन्हें बहुत आकर्षित किया है। बताते चलें कि जयपुर में 25वें आईफा का पर्व मनाने से अभिषेक बेहद खुश हैं और इसे एक बड़ा अवसर मानते हैं।

अभिषेक ने अपने सफर के बारे में भी बात की और कहा कि वह इसे संघर्ष नहीं, बल्कि मेहनत मानते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने हमेशा अपने कार्य को प्राथमिकता दी और सिनेमा के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई है। प्रदर्शनी ने भी उन्हें अवसर दिए और अब वहकासुलर ऑडियंस के सामने होस्टिंग कर रहे हैं, जिसके लिए वह आईफा का आभार मानते हैं। अभिनेता इरफान खान के प्रति अपनी प्रेरणा साझा करते हुए, उन्होंने कहा कि उनकी अनुपस्थिति एक बड़ा नुकसान है, लेकिन उनकी कला आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है।

अभिषेक ने अपनी आगामी परियोजनाओं के बारे में चर्चा की और बताया कि वह कॉमेडी के अलावा मर्मस्पर्शी सामाजिक ड्रामा और रिश्तों पर आधारित कहानियों में अपने अभिनय कौशल का प्रदर्शन करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अभिनेताओं के लिए कास्टिंग डायरेक्टर होना एक फायदेमंद अनुभव रहा है, जिससे उन्हें निर्देशकों की आवश्यकताओं को समझने में मदद मिली है। वर्तमान समय में, भारतीय सिनेमा में स्पाई और हॉरर कॉमेडी के विकास के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी जड़ों को न भूलें और फिल्म के सुंदरता में कहानी को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करें।

आखिर में, अभिषेक ने राजस्थान की अद्भुत सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख किया, जिसमें किले, महल और अन्य ऐतिहासिक धरोहरें शामिल हैं। उन्होंने इसे भारतीय सिनेमा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को राजस्थान का भ्रमण करना चाहिए। उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्मों की सफलता का श्रेय तकनीकी विकास को दिया और बताया कि उच्च तकनीकी मानकों के बावजूद, कहानी को सच्चाई से अपनी पहचान बनानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रीमेक का चलन उस समय बढ़ा जब फिल्म बनाने की प्रक्रिया महंगी हो गई, जिससे निर्माता पुरानी कहानियों पर अधिक भरोसा करने लगे। यह जरूरी है कि हम नई ओरिजिनल कहानियों को विकसित करने पर ध्यान दें ताकि भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा मिल सके।

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